घाटी में अमन जरूरी
Updated at : 12 Jul 2016 6:16 AM (IST)
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कश्मीर घाटी फिर अशांत है. लगभग पूरी घाटी में कर्फ्यू है. 23 लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों घायल हैं. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रा को भी तीन दिनों तक रोकना पड़ा. हालांकि सोमवार से यात्रा को आंशिक रूप से बहाल किया गया है, पर कई जगहों […]
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कश्मीर घाटी फिर अशांत है. लगभग पूरी घाटी में कर्फ्यू है. 23 लोगों की मौत हो चुकी है, सैकड़ों घायल हैं. ऐसे तनावपूर्ण माहौल में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अमरनाथ यात्रा को भी तीन दिनों तक रोकना पड़ा. हालांकि सोमवार से यात्रा को आंशिक रूप से बहाल किया गया है, पर कई जगहों पर तीर्थयात्री फंसे हैं.
रिपोर्टों के मुताबिक, देश के अलग-अलग इलाकों से आये इन यात्रियों को कई तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है. यह अफसोस की बात ही कही जायेगी कि श्रद्धालुओं को पर्याप्त सुविधा मुहैया कराने और उनकी समुचित मदद में केंद्र एवं राज्य सरकारें विफल रही हैं. प्रशासन को भली-भांति पता होता है कि पवित्र अमरनाथ के दर्शन के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं.
यात्रा के लिए सुरक्षा को चाक-चौबंद रखने के साथ-साथ बारिश और भू-स्खलन जैसी आपदाओं से निपटने की पर्याप्त तैयारी भी सरकारों की जिम्मेवारी है. यदि हर परिस्थिति से निबटने के इंतजाम पहले से कर लिये गये होते, तो तनाव के मौजूदा दौर में श्रद्धालुओं को ज्यादा परेशानी नहीं होती. फिलहाल, संतोष की बात है कि यात्रियों के आने-जाने का सिलसिला धीरे-धीरे ही सही, फिर से शुरू हो रहा है.
उम्मीद करनी चाहिए कि शेष अमरनाथ यात्रा बिना रुकावट के पूरी हो जायेगी. लेकिन, इसके लिए जरूरी है कि घाटी में तुरंत शांति स्थापित करने की ठोस पहल की जाये. उग्र और क्रुद्ध प्रदर्शनकारियों पर अत्यधिक बल-प्रयोग के अलावा मृतकों और घायलों के परिजनों के साथ दुर्व्यवहार की खबरें चिंता पैदा करनेवाली हैं.
ऐसे रवैये से लोगों में रोष बढ़ना स्वाभाविक है. इससे इनकार नहीं किया जा सकता कि कश्मीरियों की प्रतिक्रिया का अनुमान होते हुए भी प्रशासनिक अमला लापरवाह बना रहा, जिसके चलते मौजूदा हालात पैदा हुए हैं. अब घाटी के लोगों के क्षोभ को शांत करने के लिए राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर किये जा रहे प्रयासों को तेज करना जरूरी है, ताकि सामान्य जनजीवन जल्द बहाल हो सके. कश्मीर समस्या का संपूर्ण समाधान आसान नहीं है, और न ही कश्मीरियों के असंतोष का हल दो-चार दिनों में मुमकिन है.
परंतु, सरकारें तत्काल अमन-चैन बहाल करने की दिशा में गंभीर पहल तो कर ही सकती हैं. साथ ही, सरकारों को इस पूरे प्रकरण से ठोस सबक लेने की भी जरूरत है, ताकि भविष्य में फिर ऐसी परिस्थितियों का सामना न करना पड़े.
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