चाबहार, चीन और पाकिस्तान
Updated at : 27 May 2016 6:18 AM (IST)
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तीन देशों के मुखिया – भारत के नरेंद्र मोदी, ईरान के हसन रूहानी और अफगानिस्तान के अशरफ घनी के बीच जो त्रिपक्षीय समझौता हुआ है, वह न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि ईरान का चाबहार बंदरगाह जिस दिन पूरी तरह से तिजारत के लिए खुल जायेगा उस दिन द एशिया, केंद्रीय एशिया व पूर्वी यूरोप के […]
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तीन देशों के मुखिया – भारत के नरेंद्र मोदी, ईरान के हसन रूहानी और अफगानिस्तान के अशरफ घनी के बीच जो त्रिपक्षीय समझौता हुआ है, वह न सिर्फ ऐतिहासिक है, बल्कि ईरान का चाबहार बंदरगाह जिस दिन पूरी तरह से तिजारत के लिए खुल जायेगा उस दिन द एशिया, केंद्रीय एशिया व पूर्वी यूरोप के लिए वरदान साबित होगा. भारत को अब पाकिस्तान का मुंह ताकने की जरूरत नहीं. भारत से जल मार्ग द्वारा सीधे चाबहार, फिर वहां से अफगानिस्तान. उसके बाद तो पूरा का पूरा केंद्रीय एशिया से शुरू होकर रूस और पूर्वी यूरोप के दर्जन भर देशों के साथ माल का आयात-निर्यात किया जा सकता है.
भारत को चाहिए कि बिना देरी किये इस पर युद्धस्तर पर काम शुरू कर दिया जाये़ लगे हाथों ईरान, पाकिस्तान व भारत के दरम्यान बहुचर्चित गैस पाइपलाइन परियोजना को भी अमलीजामा पहना दिया जाये तो अच्छा है. कुछ लोग इस समझौते से पाकिस्तान एवं चीन को मुंहतोड़ जवाब देना मान रहे है, यह बिल्कुल गलत है.
चीन जो आर्थिक गलियारा बना रहा है, उसका अलग महत्व है. जब तक क्षेत्र का आर्थिक विकास नहीं होगा, तब तक अस्थिरता बनी रहेगी. जिस दिन सभी हाथों को काम मिल जायेगा, उस दिन तमाम आतंकी गतिविधियां, 90% तक कम हो जायेंगी.
जंग बहादुर सिंह, जमशेदपुर
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