सांवली लड़कियों की गुहार

क्षमा शर्मा वरिष्ठ पत्रकार खरीदार सामने खड़ी थी. दुकान पर बैठी मालकिन दुकान की नौकर लड़की से कह रही थी कि वह ग्राहिका को गहने निकाल कर ही नहीं, पहन कर दिखाये. लड़की गहने को गले में, हाथों में पहन कर दिखाने लगी. कभी मंगलसूत्र पहनती, तो कभी हार. मगर बहुत से जेवर देखने के […]
क्षमा शर्मा
वरिष्ठ पत्रकार
खरीदार सामने खड़ी थी. दुकान पर बैठी मालकिन दुकान की नौकर लड़की से कह रही थी कि वह ग्राहिका को गहने निकाल कर ही नहीं, पहन कर दिखाये. लड़की गहने को गले में, हाथों में पहन कर दिखाने लगी. कभी मंगलसूत्र पहनती, तो कभी हार. मगर बहुत से जेवर देखने के बावजूद ग्राहिका चली गयी. अगले दिन लड़की की नौकरी चली गयी.
पूछिए, तो क्यों. अगले दिन मालकिन ने लड़की की मां को बुलाकर कहा-तुम्हारी लड़की सांवली है. कुछ भी पहन कर दिखाती है तो खरीददार को पसंद नहीं आता. हमें तो सामान बेचने के लिए ऐसी लड़की चाहिए, जो कुछ भी पहनकर दिखाए तो ग्राहक फौरन उसे लेने को मचल उठे. इसलिए मुझे दुकान पर गोरी लड़की चाहिए. लड़की की आंखों में आंसू आ गये. मां के साथ वह लौट गयी.
एक दूसरी घटना. पड़ोस में एक लड़की अच्छी पढ़ी-लिखी है. अच्छी नौकरी पर है. लंबी और स्मार्ट है. मगर पैंतीस को पार कर गयी और अब तक शादी नहीं हुई. कारण वही कि वह सांवली है. और लड़कों को आजकल ऐश्वर्या राय और आलिया भट्ट या कैटरीना कैफ से कम कुछ नहीं चाहिए. लड़की पढ़ी-लिखी तो हो ही, अच्छे पैसे भी कमाती हो. और जिसे पत्नी बनायें वह इतनी गोरी–चिट्टी हो कि देखने वाले देखते ही रह जायें. कई बार लगता है कि पत्नी दूसरों को दिखाने की चीज भर होती है.
इस लड़की की शादी उसके रंग के कारण नहीं हो पा रही, जिसमें उसका कोई हाथ नहीं है. माता-पिता परेशान हैं. लड़कों को कैसे समझाएं कि सांवली लड़की होना कोई गुनाह तो नहीं. अब लड़की ने साफ कह दिया है कि वह इसलिए नहीं बनी कि कोई लड़का आये. बैठे, खाये-पिये. बड़ी-बड़ी बातें करे. और फिर उसे नापसंद कर दे. वह किसी लड़के को यह अधिकार नहीं देना चाहती. और दे भी क्यों. इसलिए अब शादी करनी ही नहीं है. लड़की की नाराजगी और दुख को माता-पिता समझते हैं, इसलिए अब उसके निर्णय को मानने के अलावा उनके पास और कोई रास्ता भी नहीं है.
लड़कियों के प्रति रंग को लेकर इस तरह का बर्ताव हमारे समाज की अंगरेजों के प्रति गुलामी की मानसिकता को ही बताता है. अंगरेज चले गये, मगर हमें यह तोहफा दे गये कि जब सोचें, तब यही सोचें कि अंगरेज जो गोरे होते थे, जिन्होंने हम पर राज किया, उनका गोरा रंग ही आदर्श है.
संसार में सिर्फ गोरों को ही जिंदा रहने का हक है. हम चाहे जितने स्त्री-विमर्श की तेज आवाज में बातें करें, मगर सच्चाई तो यही है कि गोरे रंग से सिर्फ विवाह का बाजार ही नहीं नौकरियों का बाजार भी आक्रांत है. और सिर्फ यही दोनों क्यों, फिल्में मॉडलिंग, सीरियल, टीवी की एंकर्स सब में गोरी लड़कियों का बोलबाला है. माना गोरा रंग सुंदरता की निशानी है. गोरी लड़की जो कुछ भी पहन ले उस पर अच्छा लगता है. जिन व्यवसायों में सीधे-सीधे लोगों से सामना होता है, जिसे पब्लिक डीलिंग कहते हैं, वहां तो स्मार्ट और गोरे होने पर जैसे नौकरी की गारंटी हो जाती है.
बताइये कि सांवली लड़कियां कहां गुहार करें. इस अन्याय की शिकायत करें तो कहां करें. क्या सरकार सुनेगी. क्या राष्ट्रीय महिला आयोग और राज्यों के महिला आयोग इन सांवली लड़कियों के बारे में सोचेंगे.
सोच भी लें तो क्या कर लेंगे. उस मानसिकता को कैसे बदलेंगे कि ऊपरी रंग को देखकर किसी के अच्छे-बुरे होने का फैसला किया जा सके. इसीलिए गोरे रंग की क्रीमों की बाजार में भारी मांग है. दक्षिण भारत में इन क्रीमों का बड़ा बाजार है. कहा जाता है कि स्त्रियों के साथ-साथ वहां पुरुष भी इन्हें बड़ी संख्या में खरीदते हैं.
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