शिक्षा के अधिकार पर करें विचार
Updated at : 16 Dec 2015 2:44 AM (IST)
विज्ञापन

स्वतंत्रता के 68 वर्ष पूरे होने के बावजूद देश मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है. इन बुनियादी समस्याओं में शिक्षा सर्वोपरि है. तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों से दुिनया को शिक्षा पद्धति से परिचय करानेवाले देश में आज गिरते शिक्षा के स्तर को ठीक करने की जरूरत है. सुंदर पिचई, सत्य नडेला, राजीव सूरी, इंदिरा नूई […]
विज्ञापन
स्वतंत्रता के 68 वर्ष पूरे होने के बावजूद देश मूलभूत समस्याओं से जूझ रहा है. इन बुनियादी समस्याओं में शिक्षा सर्वोपरि है. तक्षशिला, विक्रमशिला जैसे विश्वविद्यालयों से दुिनया को शिक्षा पद्धति से परिचय करानेवाले देश में आज गिरते शिक्षा के स्तर को ठीक करने की जरूरत है. सुंदर पिचई, सत्य नडेला, राजीव सूरी, इंदिरा नूई जैसे भारतीय जब विश्व के दिग्गज बहुराष्ट्रीय कंपनियों के नेतृत्व की बागडोर संभालते हैं, तो हर भारतीय को उन पर गर्व होता है. दूसरी ओर, एक ऐसा बचपन भी दिखायी देता है, जिसका पेट और पीठ सट कर एक हुए जा रहा है.
वे अपने पेट की आग को शांत करने के लिए फुटपाथ पर तिरंगा बेचने को, तो कभी हाथ फैला कर भीख मांगने को मजबूर हैं. देश का भविष्य गरीबी के कारण सड़कों पर खाक छानते हुए नजर आता है. देश को इस दशा पर गंभीरता से विचार करना होगा, तािक वे भी समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें.
– शुभम श्रीवास्तव, ई-मेल से
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




