पटाखों से परहेज

Updated at : 19 Oct 2015 1:59 AM (IST)
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पटाखों से परहेज

सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को पटाखों से होनेवाले नुकसान से लोगों को सचेत करने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया है. प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तु और न्यायाधीश अमिताव रॉय की खंडपीठ ने स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों को भी इस संबंध में अपने छात्रों को जागरूक करने का निर्देश दिया है. […]

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सर्वोच्च न्यायालय ने केंद्र और राज्य सरकारों को पटाखों से होनेवाले नुकसान से लोगों को सचेत करने के लिए अभियान चलाने का निर्देश दिया है. प्रधान न्यायाधीश एचएल दत्तु और न्यायाधीश अमिताव रॉय की खंडपीठ ने स्कूलों और कॉलेजों के शिक्षकों को भी इस संबंध में अपने छात्रों को जागरूक करने का निर्देश दिया है. अदालत ने यह निर्देश तीन बच्चों की याचिका पर जारी किया है, जिसमें बच्चों ने प्रदूषण-मुक्त वातावरण में जीने के अपने अधिकार का हवाला देते हुए पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल को नियंत्रित करने का निवेदन किया था.

विगत कुछ सालों से दीपावली पर आतिशबाजी के तेजी से बढ़ते प्रचलन से शहरी क्षेत्रों में वायु और ध्वनि प्रदूषण में भयानक वृद्धि हो रही है. पिछले तीन वर्षों में देश की राजधानी दिल्ली में दीपावली के दौरान प्रदूषण के स्तर में स्वीकृत मानक से 10से 13 गुनी बढ़ोतरी दर्ज की गयी थी. पटाखों से होनेवाले प्रदूषण में ऐसे खतरनाक रसायन और अति सूक्ष्म कण होते हैं जो सांस, फेफड़े, खून और हृदय से संबंधित गंभीर स्थायी बीमारियों के कारण बन सकते हैं. इनका सबसे अधिक असर बच्चों और बुजुर्गों पर होता है.

इससे जानवर और पक्षी भी नहीं बच पाते हैं तथा पानी और खाद्य पदार्थों पर नुकसानदेह प्रभाव पड़ता है. वर्ष 2008 के विस्फोटक पदार्थ कानून में साफ कहा गया है कि पटाखों के डिब्बे पर उसमें प्रयुक्त रसायनों के बारे में जानकारी देना जरूरी है.

लेकिन पटाखा व्यापारी इन निर्देशों का पालन नहीं करते. उत्सवों के अवसर पर मुनाफा कमाने की होड़ में भारी मात्रा में पटाखे अवैध तरीके से बनाये जाते हैं. इन पर नियंत्रण करने में प्रशासन विफल रहा है. इन दिनों चीन से अवैध रूप से लाये जा रहे पटाखों के कारण भी हालात खराब हो रहे हैं. इस वर्ष अगस्त और सितंबर में राजस्व गुप्तचर निदेशालय ने 285 मीट्रिक टन तस्करी से लाये जा रहे पटाखे बरामद किये हैं, जो 2014-15 में बरामद 104 मीट्रिक टन से करीब तीन गुना ज्यादा है. दीपावली में करीब 10 हजार करोड़ रुपये आतिशबाजी पर खर्च किये जाते हैं, जबकि पांच सौ करोड़ से कम के खर्च पर मंगल ग्रह पर सैटेलाइट भेजा जा सकता है. ऐसे में सरकारों के साथ समाज को भी पटाखों के बेहिसाब इस्तेमाल के बारे में गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है.

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