विलुप्त न होने पाये यह पोस्टकार्ड

Updated at : 10 Oct 2015 1:15 AM (IST)
विज्ञापन
विलुप्त न होने पाये यह पोस्टकार्ड

एसएमएस और ई-मेल के युग में हम पत्र लिखना बिल्कुल भूल ही गये हैं. हाथ से लिखा पत्र जब किसी को मिलता है, तो लिखनेवाला स्वयं उसके सामने आ जाता है. वह भाई-बहन, मां-भाभी, परिवार का सदस्य या फिर कोई मित्र ही हो, पत्र अपने साथ उसका चित्र लेकर आता है. लिखनेवाले से जुडी यादें […]

विज्ञापन
एसएमएस और ई-मेल के युग में हम पत्र लिखना बिल्कुल भूल ही गये हैं. हाथ से लिखा पत्र जब किसी को मिलता है, तो लिखनेवाला स्वयं उसके सामने आ जाता है. वह भाई-बहन, मां-भाभी, परिवार का सदस्य या फिर कोई मित्र ही हो, पत्र अपने साथ उसका चित्र लेकर आता है.
लिखनेवाले से जुडी यादें उन हाथ से लिखी पंक्तियों में होती हैं. आज का समय शायद भावनाओं और संवेदनाओं का नहीं है. घर के बाहर लगे लेटर बॉक्स किसी अपने के पत्र का इंतजार नहीं करते. उनके पास तो बिजली, टेलीफोन, मोबाइल के बिल या बीमा प्रीमियम के नोटिस आते हैं.
पोस्टकार्ड को एक दोस्त के रूप में देखा जाता था. आज उसकी कोई पहचान नहीं. उसे अनपढ़-गंवार के प्रतिनिधि के रूप में देखा जाता है. पोस्टकार्ड विलुप्त ना हो जाये, इसलिए हम कुछ पुराने दोस्तों ने एक पहल की है. हम एक-दूसरे को पोस्टकार्ड लिखते हैं. आप भी अगर इस अभियान में शामिल हों, तभी बचेगा पोस्टकार्ड.
-चंदर धींगरा, कोलकाता
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola