आतंक का साया

Published at :01 Oct 2015 5:45 AM (IST)
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आतंक का साया

बांग्लादेश में सक्रिय इसलामी चरमपंथी वहां के उदारमना नागरिकों को जब-तब अपनी हिंसा का शिकार बनाते रहे हैं, यह बात तो बरसों से लोगों को पता है, पर विश्व में आतंक का पर्याय बन चुका आतंकी संगठन आइएसआइएस इन चरमपंथियों के भीतर अपनी पैठ बना कर हमलावर हो सकता है, यह बात तनिक हैरतअंगेज भी […]

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बांग्लादेश में सक्रिय इसलामी चरमपंथी वहां के उदारमना नागरिकों को जब-तब अपनी हिंसा का शिकार बनाते रहे हैं, यह बात तो बरसों से लोगों को पता है, पर विश्व में आतंक का पर्याय बन चुका आतंकी संगठन आइएसआइएस इन चरमपंथियों के भीतर अपनी पैठ बना कर हमलावर हो सकता है, यह बात तनिक हैरतअंगेज भी है और भारत की आंतरिक सुरक्षा के लिहाज से चिंताजनक भी. हैरतअंगेज इसलिए कि आइएसआइएस की गतिविधियों का मुख्य केंद्र (सीरिया और इराक) भौगोलिक रूप से बांग्लादेश से बहुत दूर है.
इसलिए माना जाता रहा है कि आइएसआइएस अपने इंटरनेटी संचार-संजाल के बल पर बांग्लादेश या दक्षिण एशिया के किसी अन्य देश से लड़ाकों के भर्ती होने की उम्मीद तो कर सकता है, पर सामरिक बाधाओं को पार कर इन देशों को अपनी गतिविधियों को अंजाम देने का केंद्र बना पाना उसके लिए मुश्किल होगा.
लेकिन, बांग्लादेश की राजधानी ढाका के अत्यंत सुरक्षित राजनयिक इलाके में इटली के एक नागरिक की हत्या की जिम्मेवारी लेकर आइएसआइएस ने संकेत दिया है कि दुनिया पर इसलामी हुकूमत कायम करने के अपने हिंसक और उन्मादी अजेंडे को वह दक्षिण एशिया के देशों में भी फैला सकता है.
भारत के लिए यह स्थिति चिंताजनक है, इसलिए बांग्लादेश से लगती सीमा पर ज्यादा चौकस रहना होगा. अच्छी बात यह है कि हाल में केंद्र सरकार ने आइएसआइएस के खतरे को भांपते हुए सुरक्षा-एजेंसियों को सतर्कता के विशेष उपाय करने के लिए कहा है.
हालांकि, आंतरिक स्तर पर चौकसी बढ़ाना पर्याप्त कदम नहीं है. आइएसआइएस के बढ़ते खतरे से भारत सहित दक्षिण एशिया के शेष देश तभी निपट पायेंगे, जब अंतरराष्ट्रीय स्तर की संस्थाएं इस दिशा में कोई ठोस नीतिगत पहल करें. फिलहाल विश्व के दो शक्तिशाली मुल्कों- अमेरिका और रूस- के राष्ट्राध्यक्ष इसी बात पर सहमत नहीं हो पा रहे हैं कि सीरिया में बेकाबू होते आइएसआइएस के पर किस तरह कतरे जायें.
प्रधानमंत्री मोदी ने हाल के अमेरिका दौरे में जोर देकर कहा कि विश्व को जल्दी से जल्दी आतंकवाद की परिभाषा तय कर लेनी चाहिए, क्योंकि जब आतंकवाद की परिभाषा तय करने में इतनी देर लग रही है, तो आतंकवाद से निपटने में कितना समय लगेगा. अच्छा होगा कि बांग्लादेश की घटना को एक सबक की तरह लेते हुए दक्षेस में शामिल देश आइएसआइएस को रोकने के लिए कोई बहुराष्ट्रीय पहल करें.
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