एक ही दल में विचार के दोहरे मानदंड?

Published at :19 Aug 2015 6:54 AM (IST)
विज्ञापन
एक ही दल में विचार के दोहरे मानदंड?

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर समय-समय पर विचारधारा बदलती रहती है. खास कर भाजपा के नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं में गांधीजी के प्रति विचारों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है. देश के प्रधानमंत्री गांधीजी के प्रति अपनी पूरी भक्ति प्रदर्शित करते हैं, तो उनकी ही पार्टी के कुछ सांसद गांधीजी को गोली […]

विज्ञापन
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को लेकर समय-समय पर विचारधारा बदलती रहती है. खास कर भाजपा के नेताओं और उनके कार्यकर्ताओं में गांधीजी के प्रति विचारों में तेजी से बदलाव देखने को मिल रहा है.
देश के प्रधानमंत्री गांधीजी के प्रति अपनी पूरी भक्ति प्रदर्शित करते हैं, तो उनकी ही पार्टी के कुछ सांसद गांधीजी को गोली दागनेवाले को देशभक्त की संज्ञा से अभिहित करते हैं. बिहार के चुनावी भाषण में श्रोताओं में उत्तेजना पैदा करने के लिए प्रधानमंत्री गांधीजी के भारत छोड़ो आंदोलन का जिक्र करते हैं, तो उनकी पार्टी के सांसद गोडसे को देशभक्त बताते हैं.
यह समझ में नहीं आता कि आखिर एक ही राजनीतिक दल में दो विचारधारा कैसे प्रवाहित हो सकती है? देश के पीएम गांधी के प्रति कुछ और विचार रखते हैं और पार्टी के कार्यकर्ता कुछ और? आखिर ऐसा दोहरा मानदंड क्यों?
शंभूनाथ सहाय, देवघर
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola