अबूधाबी से दुबई तक होगा नमो-नमो

Published at :13 Aug 2015 12:20 AM (IST)
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अबूधाबी से दुबई तक होगा नमो-नमो

पुष्परंजन दिल्ली संपादक, ईयू-एशिया न्यूज उन कयासों पर पानी फिरा है, जिसमें कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ) से पहले इजराइल जायेंगे. सितंबर 2014 में जब बिन्यामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी न्यूयॉर्क में मिले, तो यही उम्मीद की गयी थी. इजराइली प्रतिरक्षा मंत्री मोशे यालोन फरवरी 2015 में ‘एडवांस मिसाइल […]

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पुष्परंजन
दिल्ली संपादक, ईयू-एशिया न्यूज
उन कयासों पर पानी फिरा है, जिसमें कहा जा रहा था कि प्रधानमंत्री मोदी, संयुक्त अरब अमीरात (यूएइ) से पहले इजराइल जायेंगे. सितंबर 2014 में जब बिन्यामिन नेतन्याहू और पीएम मोदी न्यूयॉर्क में मिले, तो यही उम्मीद की गयी थी.
इजराइली प्रतिरक्षा मंत्री मोशे यालोन फरवरी 2015 में ‘एडवांस मिसाइल सिस्टम’ के साझा निर्माण समझौते (कल्याणी-राफेल डील) के लिए भारत आये, तब भी यही लगा कि प्रधानमंत्री मोदी मध्य एशिया में सबसे पहले तेल अवीव जायेंगे. प्रधानमंत्री की प्राथमिकता सूची में ‘यूएइ’ क्या बिहार में चुनाव के मद्देनजर है? यह सवाल इसलिए बनता है, क्योंकि 26 लाख भारतीय अप्रवासियों में से एक लाख के करीब बिहारी इस समय यूएइ में काम कर रहे हैं.
17 अगस्त, शाम छह बजे पचास हजार दर्शकों की क्षमता वाले दुबई क्रिकेट स्टेडियम के ‘मोदी शो’ में यह स्पष्ट हो जायेगा कि प्रवासी भारतीयों से क्या-क्या उम्मीद लगाये प्रधानमंत्री उनके बीच हैं.
इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर कमेटी (आइसीडब्ल्यूसी) के आयोजक आशा कर रहे हैं कि उस दिन न्यूयॉर्क के मेडिसन स्क्वॉयर गार्डन से भी बड़ा शो होगा. 16 अगस्त को प्रधानमंत्री मोदी अबूधाबी में होंगे और 17 को दुबई में. 1981 में इंदिरा गांधी की यूएइ यात्रा के चौंतीस साल बाद भारतीय प्रधानमंत्री राजकीय भ्रमण पर होंगे.
प्रधानमंत्री मोदी की इस यात्रा को इजराइल किस नुक्ता-ए-नजर से देखता है, उसके लिए थोड़ा इंतजार करना होगा. प्रत्यक्ष तौर पर इजराइल-यूएइ के बीच कूटनीतिक संबंध नहीं हैं.
लेकिन 18 दिसंबर, 2014 को अबूधाबी से तेल अवीव एयरपोर्ट पर उतरा विमान पीटीजी-315 ने कई कहानियों को जन्म दे दिया है. यह यात्रा ी विमान तेल अवीव से पहले जॉर्डन की राजधानी अम्मान के क्वीन आलिया एयरपोर्ट पर भी उतरा था, इस बारे में चुप्पी साध ली गयी. जॉर्डन उन चंद अरब देशों में है, जिसके इजराइल से कूटनीतिक संबंध हैं. इसलिए प्रधानमंत्री मोदी के यूएइ जाने से तेल अवीव से तल्खी हो जायेगी, ऐसा नहीं लगता.
यूएइ में पाकिस्तानी प्रवासी करीब बारह लाख हैं. सऊदी अरब और ब्रिटेन के बाद यूएइ ऐसा मुल्क है, जहां पाकिस्तानी बड़ी तादाद में हैं. 1 दिसंबर, 1971 को ब्रिटेन से आजाद हुए यूएइ को सबसे पहले पाकिस्तान ने मान्यता दी थी.
दोनों मित्र देश हैं. 2014 में पाकिस्तान-यूएइ के बीच नौ अरब डॉलर का व्यापार हुआ था, जबकि भारत-यूएइ के बीच 33 अरब डॉलर का व्यापार है. यूएइ 2030 तक भारत को ‘टॉप एक्सपोर्ट डेस्टीनेशन’ बनाये रखेगा, यानी निर्यात के लिए भारत के मुकाबले, जापान और चीन दूसरे-तीसरे नंबर पर हैं.
यूएइ-भारत के बीच 475 उड़ानें हर हफ्ते भरी जा रही हैं. जनवरी 2015 तक यूएइ ने भारत में आठ अरब डॉलर का निवेश कर रखा था, उसमें एफडीआइ 3.01 अरब डॉलर का है, बाकी सारा ‘पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट’ है. यूएइ एक्सचेंज के अध्यक्ष सुधीर शेट्टी के अनुसार, ‘भारत में यूएइ का निवेश मुख्यत: पांच क्षेत्रों अधोसंरचना, विद्युत, धातु उद्योग, सर्विस सेक्टर, कंप्यूटर सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर में किया गया है.’
पाकिस्तान के लिए यह कुंठा का कारण है कि इतने सारे पापड़ बेलने के बाद भी वह भारत के मुकाबले यूएइ से व्यापार नहीं कर सका. यूएइ में अधोसंरचना से लेकर स्वास्थ्य सेवा, और ‘मैनपावर’ तक पर भारतीयों का वर्चस्व है. ‘इंडियन सुपर हंड्रेड’ सौ एनआरआइ उद्योगपतियों की ऐसी ‘सक्सेस स्टोरी’ है, जिन्होंने यूएइ में सफलता के झंडे गाड़ दिये हैं.
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने शरिया आधारित म्युचुअल फंड की योजना बनायी है. बांबे स्टॉक एक्सचेंज ने भी पहला ‘शरिया इंडेक्स’ लांच किया है, इससे मध्य-पूर्व से लेकर भारत तक करोड़ों मुसलमान ग्राहक और करीब सात सौ इसलामी कंपनियों के दिलचस्पी लेने की उम्मीद है. मोदी जी दुबई क्रिकेट स्टेडियम में ‘शरिया बैंकिंग’ और ‘शरिया इंडेक्स’ को कैसे पेश करते हैं, यह देखना होगा.
यूएइ, भारतीय वस्तुओं को बाहर के बाजार में भेजने के वास्ते ‘ट्रेड कॉरीडोर’ का काम कर रहा है.
गल्फ, पश्चिम अफ्रीका, सेंट्रल एशिया के देश, ईरान, अफगान तक भारतीय माल, यूएइ के बरास्ते जा रहे हैं. यूएइ के निवेशकों को भारत लाने के लिए 24 नवंबर, 2014 को उभयपक्षीय निवेश सुरक्षा समझौता (बीआइपीपीए) और डबल टैक्सेशन एव्याएड एग्रीमेंट (डीटीएए) किये गये. ऐसे समझौते पिछली सरकार में हुए होते, तो देश को उसका लाभ और मिल सकता था.
भारत में निवेश के कुछ और इलाके हैं, जहां वह यूएइ को आकर्षित कर सकता है. इनमें आटोमोबाइल, एविएशन, बायोटेक्नोलॉजी, अक्षय ऊर्जा, मीडिया और इंटरटेनमेंट, हेल्थ, थर्मल पावर, इलेक्ट्रॉनिक, स्मार्ट सिटी आदि पर सरकार योजनाबद्ध तरीके से रास्ते तैयार कर सकती है. प्रधानमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी 26 विदेश यात्राएं कर चुके हैं, लेकिन अब तक फायदा बारह देशों से ही हुआ है. वित्त वर्ष 2014-15 में 19.78 अरब डॉलर का निवेश भारत में हो चुका है.
इसे प्रधानमंत्री मोदी अपनी उपलब्धियों में गिना सकते हैं. मगर यह निवेश उतना भी नहीं है कि सीना फूल कर छप्पन इंच का हो जाये.
मोदी सरकार ने जिस तरह ‘भारत निर्माण कार्यक्रम’ को प्राथमिकता पर रखा है, प्रधानमंत्री को चाहिए कि यूएइ को अपने देश में ग्रामीण अधोसंरचना के क्षेत्र में निवेश के लिए आकर्षित करें.
‘मेक इन इंडिया’ का अरबी अनुवाद खाड़ी देशों में बंटता, तो उसका दूरगामी असर देखने को मिलता. कृषि, फूड प्रोसेसिंग, सिंचाई, उर्वरक, शोध एवं विकास, लघु उद्योग जैसे क्षेत्र यूएइ के निवेशकों के लिए नये होंगे. इंडस्ट्री और निवेश पर नजर रखनेवालों का अनुमान है कि अगले दस वर्षो में तीन खरब डॉलर की एफडीआइ भारत आ सकती है, बशर्ते यहां राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता हो. विदेशी निवेशकों को यह लगना चाहिए कि उनकी जमा-पूंजी डूबेगी नहीं, और यह देश आतंकियों से सुरक्षित है.
आतंकवाद समाप्ति को लेकर यूएइ सचमुच संवेदनशील है, यह उसने साबित किया है.
82 संगठनों को यूएइ ने आतंकवादी घोषित किया है, उनमें दो भारत के ‘इंडियन मुजाहिद्दीन इन कश्मीर’ और ‘मोहम्मद आर्मी ऑफ इंडिया’ और पाकिस्तान के चार अतिवादी संगठन हैं. पाकिस्तान के आतंकी संगठनों-मोहम्मद आर्मी ऑफ पाकिस्तान, हक्कानी नेटवर्क, इस्टर्न टर्किश इस्लामिक मूवमेंट इन पाकिस्तान और लश्करे तैयबा-को यूएइ ने ‘ब्लैकलिस्टेड’ कर रखा है.
26/11 मुंबई हमले के जिम्मेवार लश्करे तैयबा के अतिवादियों को पाकिस्तान कैसे बचा रहा है, उसका पता यूएइ को है. लोहा गरम है, मोदी जी अबूधाबी से दुबई तक उस पर कितना चोट करते हैं, देश को उसका इंतजार रहेगा!
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