खतरनाक मंसूबे

Published at :13 Aug 2015 12:13 AM (IST)
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खतरनाक मंसूबे

आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं होता, पर अपनी करतूतों से वह पूरी दुनिया को दहला सकता है. कभी अलकायदा के सुप्रीम कमांडर के रूप में ओसामा बिन लादेन ने इसे साबित करने की कोशिश की थी. अब यह जिम्मा इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी आइएसआइएस और उसके कमांडर अबू बक्र अल बगदादी ने […]

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आतंकवाद का कोई चेहरा नहीं होता, पर अपनी करतूतों से वह पूरी दुनिया को दहला सकता है. कभी अलकायदा के सुप्रीम कमांडर के रूप में ओसामा बिन लादेन ने इसे साबित करने की कोशिश की थी.
अब यह जिम्मा इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया यानी आइएसआइएस और उसके कमांडर अबू बक्र अल बगदादी ने उठाया है. ओसामा का मंसूबा पूरी दुनिया पर बंदूक के जोर से इस्लामी हुकूमत कायम करना था और यही मंसूबा बगदादी का भी है.
ओसामा के विश्वासपात्र रहे अल-जरकवी की कायम की हुई जेहादियों की एक छोटी सी जमात ने उसके मारे जाने के बाद इराक में सक्रिय कुछ उपद्रवी जमातों के साथ मिल कर अपने को इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक का नाम दिया और अप्रैल, 2010 में कमान अल बगदादी के हाथ में आते ही इसने दहशत के विस्तार में अलकायदा के कारनामों को भी पीछे छोड़ दिया. इस साल के मार्च तक आइएसआइएस इराक और सीरिया के कुछ हिस्सों को मिला कर करीब 1 करोड़ लोगों की रिहाइश पर अपनी हुकूमत कायम कर चुका है.
अब एक ब्रिटिश अखबार ने बीबीसी संवाददाता एंर्डयू होस्केन की किताब ‘एम्पायर ऑफ फियर : इनसाइड द इस्लामिक स्टेट’ में छपे नक्शे के हवाले से खबर छापी है कि अपने संस्थापक अल-जरकवी की सात सूत्री योजना पर अमल करते हुए आइएसआइएस स्पेन से चीन तक के पूरे भूभाग पर कब्जे के इरादे से आगे बढ़ रहा है और इस भूभाग में पूरा भारतीय उपमहाद्वीप शामिल है.
आइएसआइएस की इस योजना को शेखचिल्ली की खामख्याली कह कर हंसी में उड़ाने से पहले कुछ प्रश्नों पर मननपूर्वक सोचना होगा. पहला तो यही कि क्या आइएसआइएस ने अपने ज्ञात इतिहास में किसी राष्ट्रराज्य को युद्धभूमि में छकाते हुए कोई भूभाग छोड़ने पर मजबूर किया है?
अगर उसने ऐसा किया है, तो उसकी योजना को अन्य राष्ट्रराज्यों को भी गंभीरता से लेना होगा. यह संगठन अगर पूरी दुनिया में कुख्यात हुआ है, तो उसकी एक वजह है किसी राष्ट्रराज्य की अंदरूनी अशांति का फायदा उठा कर उसके भूभाग पर कब्जा करने की उसकी सैन्य-क्षमता. 2014 के शुरुआती महीनों से आइएसआइएस ने इराक सरकार की फौज को पश्चिमी इराक के प्रमुख शहरों से पीछे धकेलने में कामयाबी हासिल की.
उसके लड़ाके इतने ताकतवर साबित हुए कि एकबारगी इराक सरकार डांवाडोल होती नजर आयी और अपने खोये हुए भूभाग पर फिर से अधिकार के लिए उसे अमेरिका से सैन्य-हस्तक्षेप की गुहार लगानी पड़ी. सीरिया में तो आइएसआइएस ने विद्रोही धड़ों और सरकारी फौजों, दोनों के खिलाफ अपनी ताकत दिखा कर कुछ इलाकों पर दबदबा कायम किया है.
दूसरा, हमें यह भी सोचना होगा कि क्या इस संगठन के पास अपनी योजना को अमल में लाने के लिए पर्याप्त धन और जन-बल है? इसका उत्तर भी आइएसआइस को ताकतवर सिद्ध करने के लिहाज से काफी है.
‘द मिरर’ में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, आइएसआइएस के पास करीब 2 अरब पौंड की संपत्ति है और उसकी धन की शक्ति का स्नेत निकट भविष्य में सूखता नजर नहीं आता, क्योंकि इराक और सीरिया में उसने तेल के कुएं और प्राकृतिक गैस के ठिकानों पर कब्जा कर रखा है तथा इस संपदा का व्यापार करने का अपना तंत्र विकसित कर लिया है. रिपोर्ट के अनुसार, आइएसआइएस में करीब 50 हजार लड़ाके शामिल हो चुके हैं और इस बड़ी तादाद में अलग-अलग देशों के युवा हैं. वह सोशल मीडिया पर अपनी आक्रामक मौजूदगी के सहारे कई मुल्कों के राह भटके हुए नौजवानों को आकर्षित करने में सफल रहा है.
अपने प्रभावक्षेत्र यानी सीरिया, इराक तथा तुर्की से इतर, बीते जून में ट्यूनीशिया में 38 पर्यटकों को क्रूरतापूर्वक मार कर उसने बढ़ती क्षमता का परिचय भी दे दिया है. उसकी यही मारक क्षमता और विस्तार पूरी दुनिया के लिए एक खतरे की घंटी है और तमाम देशों को इसके विरुद्ध कोई कारगर योजना बनाने के लिए आगाह करती है.
भारत के लिए आइएसआइएस का खतरा चीन की तुलना में कहीं ज्यादा है. पाकिस्तानी आतंकी जमातों के बूते आइएसआइएस कश्मीर में कई दफे सांकेतिक मौजूदगी दर्ज करा चुका है, जहां से उसके झंडे लहराये जाने की खबरें आती रही हैं.
भारतीय मूल के कुछ नौजवानों के आइएसआइएस के लड़ाकों की फौज में शामिल होने की भी खबरें भी आयी हैं. जाहिर है, पड़ोसी मुल्क द्वारा प्रायोजित आतंकवाद से दशकों से जूझ रहे भारत के लिए आइएसआइएस का खतरा एशिया के अन्य मुल्कों की तुलना में कहीं ज्यादा आसन्न और वास्तविक है.
अच्छी बात है कि केंद्र सरकार ने इस खतरे से निपटने के लिहाज से कुछ तैयारियां शुरू कर दी हैं. आइएसआइएस के विरुद्ध अगर दक्षिण एशिया में कोई साझी रणनीति बनती है, तो यह एक जिम्मेवारी भरा कदम होगा.
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