आदि शंकराचार्य की भ्रांति करें दूर
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :31 Jul 2015 11:40 PM (IST)
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संपादक महोदय, आपके समाचार पत्र प्रभात खबर में बीती 17 जुलाई के अंक में नासिक कुंभ मेले पर विशेष आयोजन समेत अंक प्रकाशित किया गया. इसमें कुंभ मेलों को लेकर अच्छी जानकारी थी. महाशय, इस विशेष आयोजन में एक चीज मुङो अटपटी लगी. वह यह कि इसमें आदि शंकराचार्य को आठवीं अथवा नौवीं सदी ईसा […]
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संपादक महोदय, आपके समाचार पत्र प्रभात खबर में बीती 17 जुलाई के अंक में नासिक कुंभ मेले पर विशेष आयोजन समेत अंक प्रकाशित किया गया. इसमें कुंभ मेलों को लेकर अच्छी जानकारी थी. महाशय, इस विशेष आयोजन में एक चीज मुङो अटपटी लगी.
वह यह कि इसमें आदि शंकराचार्य को आठवीं अथवा नौवीं सदी ईसा पूर्व बताया गया है. महाशय, जहां तक मुङो जानकारी है कि आदि शंकराचार्य का समय 509-477 ईसा पूर्व है. इस समयांतराल को कांची कामकोटि पीठ और पुरी के गोवर्धन मठ पीठ भी मानती है.
दूसरे सुख्यात शंकराचार्य का काल 22 ईसा पूर्व तथा छठे सुख्यात अद्वैत दार्शनिक शंकराचार्य धीर शंक अथवा अभिनव शंका काल आठवीं-नौवीं सदी ईसा पूर्व के बीच रहा है. अत: आपसे निवेदन है कि आगे के विशेष आयोजन में इसे संकलित करने की कृपा करेंगे.
स्वामी गोपाल आनंद, रजरप्पा पीठ
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