यह हेमा की कैसी संवेदनशीलता है?
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :14 Jul 2015 11:28 PM (IST)
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किसी बड़ी दुर्घटना में खुशकिस्मती से बचा सुरक्षित व्यक्ति सबसे पहले अपनी सुध लेता है, फिर परिजनों की ओर ध्यान देता है. सब कुछ ठीक-ठाक होने पर लंबी सांस छोड़ कर सकुशलता का परिचय देता है. लेकिन यहीं से शुरू होती है संवेदनाओं की एक अग्निपरीक्षा. दुर्घटना के बाद मची भगदड़ में तो हर कोई […]
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किसी बड़ी दुर्घटना में खुशकिस्मती से बचा सुरक्षित व्यक्ति सबसे पहले अपनी सुध लेता है, फिर परिजनों की ओर ध्यान देता है. सब कुछ ठीक-ठाक होने पर लंबी सांस छोड़ कर सकुशलता का परिचय देता है.
लेकिन यहीं से शुरू होती है संवेदनाओं की एक अग्निपरीक्षा. दुर्घटना के बाद मची भगदड़ में तो हर कोई अपनों को तलाशता है, लेकिन कोई दूसरों की भी सुध लेता है क्या? मथुरा-जयपुर हाइवे पर हेमा मालिनी की दुर्घटना में मौत दूसरी गाड़ी में सवार मासूम की हो गयी.
यह असंवेदनहीनता की पराकाष्ठा ही है कि जुटे लोगों ने हेमा मालिनी को तो हाथोंहाथ उठा कर जयपुर के बड़े अस्पताल में दाखिल करा दिया, लेकिन बच्ची और परिजनों उसके हाल पर ही छोड़ दिया गया. आज हेमा मालिनी पीड़ित परिवार को सहारा देने के बजाय उसी को गलत ठहरा रही हैं. यह कहां की संवेदना है.
एमके मिश्र, रांची
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