जुल्म के खिलाफ यह खामोशी क्यों?

भारत देश तो आजाद हो गया, पर हम कब होंगे? आखिर हमें पूर्ण आजादी कब मिलेगी? आज भी हम गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं. समाज में अन्याय, भ्रष्टाचार, लूट-खसोट चरम पर है, पर हम खामोश हैं. राह चलते कहीं अन्याय हो रहा है, तो कहीं पर अनैतिक कार्यो के जरिये समाज में गंदगी फैलाने […]
भारत देश तो आजाद हो गया, पर हम कब होंगे? आखिर हमें पूर्ण आजादी कब मिलेगी? आज भी हम गुलामी की जिंदगी जी रहे हैं. समाज में अन्याय, भ्रष्टाचार, लूट-खसोट चरम पर है, पर हम खामोश हैं.
राह चलते कहीं अन्याय हो रहा है, तो कहीं पर अनैतिक कार्यो के जरिये समाज में गंदगी फैलाने का काम किया जा रहा है. किसी लड़की की आबरू सरेआम लूटी जा रही है, तो किसी महिला के गले से सरेआम चेन झपट ली जाती है.
शहरों की गलियों, पार्को और सड़कों पर चेन झपटमारी, आबरू से खिलवाड़ और अनैतिक कार्यो का होना तो आम है, लेकिन अब इस प्रकार के असामाजिक कार्य गांवों में भी पैर पसार चुके हैं. फिर भी हम सबकुछ देख कर चुपचाप ही रहते हैं. अन्याय सहने की हमें आदत सी हो गयी है. कोई जुल्म के खिलाफ आवाज नहीं उठाता. आखिर क्यों?
अजय कुमार, लोहरदगा
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