सुख-शांति हमारे ही अंदर है

Published at :27 Sep 2013 2:52 AM (IST)
विज्ञापन
सुख-शांति हमारे ही अंदर है

कहते हैं कि गोधन, गजधन, बाजिधन और रतन-धन खान/ जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान. तो फिर सबसे बड़ा धन क्या हुआ? ‘संतोष-धन’. दिन-रात हमारी दौड़ भौतिक पदार्थो को संग्रह करने में लगी है, जिसके पीछे एक ही मकसद है सुख-शांति की प्राप्ति. लेकिन बात विपरीत हो रही है, सुख-शांति के बजाय दु:ख […]

विज्ञापन

कहते हैं कि गोधन, गजधन, बाजिधन और रतन-धन खान/ जब आवै संतोष धन, सब धन धूरि समान. तो फिर सबसे बड़ा धन क्या हुआ? ‘संतोष-धन’. दिन-रात हमारी दौड़ भौतिक पदार्थो को संग्रह करने में लगी है, जिसके पीछे एक ही मकसद है सुख-शांति की प्राप्ति. लेकिन बात विपरीत हो रही है, सुख-शांति के बजाय दु:ख और अशांति मिलती है, मतलब कहीं न कहीं गड़बड़ है.

और वह गड़बड़ है हमारी सोच में, हमारे चिंतन में. संत-महात्माओं ने हमेशा से कहा है कि जिस सुख-शांति-संतुष्टि को तुम चाहते हो, वह तो सदैव तुम्हारे अंदर है, बस अंतमरुख होने की जरूरत है. ज्ञान द्वारा हमारा चिंतन, हमारी सोच अंतमरुखी हो सकती है. ज्ञान-चिंतन से वैराग्य, अपरिग्रह, ईश्वर के प्रति प्रेम व समर्पण का भाव जाग्रत होता है, जिससे सहज में संतोष धन की प्राप्ति होती है.
आरडी अग्रवाल, मुंबई

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola