मनरेगाकर्मियों से यह बेरुखी क्यों?

Published at :26 Sep 2013 2:14 AM (IST)
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मनरेगाकर्मियों से यह बेरुखी क्यों?

मनरेगाकर्मियों के प्रति सरकार की उदासीनता भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण एवं विश्व के सबसे बड़े रोजगार सृजन कार्यक्रम की प्रगति में बाधा बनती जा रही है. कहने को तो मनरेगा देशभर में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार की गारंटी देता है, लेकिन असल में इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करनेवाले कर्मियों के लिए […]

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मनरेगाकर्मियों के प्रति सरकार की उदासीनता भारत सरकार के इस महत्वपूर्ण एवं विश्व के सबसे बड़े रोजगार सृजन कार्यक्रम की प्रगति में बाधा बनती जा रही है. कहने को तो मनरेगा देशभर में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को रोजगार की गारंटी देता है, लेकिन असल में इस कार्यक्रम को सफलतापूर्वक क्रियान्वित करनेवाले कर्मियों के लिए रोजगार एवं सुरक्षित भविष्य की गारंटी नहीं देता है. ज्ञात हो कि मनरेगा के सफल कार्यान्वयन के लिए पंचायत एवं प्रखंड स्तर के विभिन्न पदों पर कॉन्ट्रैक्ट कर्मियों की नियुक्ति की गयी है.

ये विभिन्न पद नियमित कर्मियों के समकक्ष हैं, लेकिन इनका मानदेय नियमित कर्मियों के वेतन के आधे से एक चौथाई के बीच है. मनरेगाकर्मी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों से गुजरते हुए मनरेगा कार्यक्रम को सफल बनाने में लगे हुए हैं, लेकिन उनका भविष्य अंधकारमय होता दिख रहा है. इसका मुख्य कारण उनके मानदेय का काफी कम होना, कोई भी अतिरिक्त सुविधा न मिलना एवं नौकरी को लेकर भविष्य सुरक्षित न होना है. आज छह वर्षो से कार्य कर रहे इन कर्मियों को अपना भविष्य अंधकारमय नजर आ रहा है. वहीं, अधिकांश मनरेगाकर्मियों की अन्य नौकरियों के लिए उम्र सीमा समाप्त हो रही है. यही कारण है कि विभिन्न पदों पर नियुक्त हुए मनरेगाकर्मियों में से लगभग आधे ने तो काम छोड़ दिया है और कई लगातार छोड़ते जा रहे हैं.

अब सवाल उठता है कि क्या सरकार अपने इस मानव संसाधन का शोषण नहीं कर रही है? क्या युवा वर्ग में अवसाद भरने के लिए सरकार दोषी नहीं है? वर्तमान में झारखंड के मुख्यमंत्री भी युवा शक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं. क्या मनरेगाकर्मी ये उम्मीद कर सकते हैं कि वर्तमान सरकार उनकी मांगों पर तत्काल कार्रवाई करेगी?

मोहम्मद इम्तियाज, बेड़ो, रांची

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