हमने ऐसे ही जीना सीख लिया है

मैं 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला हूं और हेसाग, हटिया स्थित देवी नगर में रहती हूं. यह इलाका गत 10 वर्षो से आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित होता जा रहा है. हर दिन यहां लगातार निर्माण कार्य हो रहा है. यहां घर, स्कूल, दुकानें आदि सब कुछ हैं. नहीं है तो बस एक पक्की सड़क. […]
मैं 75 वर्षीय बुजुर्ग महिला हूं और हेसाग, हटिया स्थित देवी नगर में रहती हूं. यह इलाका गत 10 वर्षो से आवासीय कॉलोनी के रूप में विकसित होता जा रहा है. हर दिन यहां लगातार निर्माण कार्य हो रहा है. यहां घर, स्कूल, दुकानें आदि सब कुछ हैं.
नहीं है तो बस एक पक्की सड़क. दरअसल यह व्यथा केवल इसी इलाके की नहीं है, बल्कि रांची सहित राज्य के हर छोटे-बड़े जिले की है. अखबारों की मानें, तो आज राज्य का कोई कोना ऐसा नहीं है, जहां सड़कों पर गड्ढे और उन गड्ढों में पानी न जमा हो. कई जगहों पर तो सड़क ही नहीं है.
सरकारें आती-जाती हैं, वोट पाने के लिए नेता कई तरह के वायदे करते हैं, लेकिन वे उन्हें शायद ही कभी पूरा कर पाते हैं. गली-मोहल्लों में लोग यूं ही अपने कपड़े घुटने के ऊपर उठा कर कीचड़ से गुजरते हैं. अब तो आदत सी हो चुकी है ऐसे जीने की.
नवल किशोरी देवी, हटिया, रांची
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