मर्ज के साथ माजरा भी समझें

16 दिसंबर के जघन्य सामूहिक बलात्कार के सभी अपराधियों को आज पूरा देश तुरंत फांसी पर देखना चाहता है. वास्तव में यह सही भी है, वरना तो बिना किसी खौफ के यह सब चलता रहेगा. बड़े दु:ख और दुर्भाग्य की बात कि आज भी बलात्कार रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं और बिलकुल […]
16 दिसंबर के जघन्य सामूहिक बलात्कार के सभी अपराधियों को आज पूरा देश तुरंत फांसी पर देखना चाहता है. वास्तव में यह सही भी है, वरना तो बिना किसी खौफ के यह सब चलता रहेगा. बड़े दु:ख और दुर्भाग्य की बात कि आज भी बलात्कार रुकने का नाम ही नहीं ले रहे हैं और बिलकुल वैसी ही जघन्य घटनाएं आज भी बराबर जारी हैं.
ऐसे तो इन जालिमों के हौसले और भी बुलंद होते रहेंगे. 18 साल से कम उम्र के ऐसे जालिमों के मन में भी उनके जुर्म और मानसिकता के आधार पर फांसी का डर बिठाना जरूरी है.
असल में अरब देशों की तरह ऐसे जालिमों को तुरंत सख्त सजा दी जानी चाहिए. इसके अलावा इन घटनाओं का कारण जानना भी जरूरी है. आज शराब, ईल साहित्य व सिनेमा–सीरियल, कामुक फैशन आदि आग में घी का काम कर रहे हैं, जिन्हें रोकना जरूरी है.
(वेद मामूरपुर, नरेला, दिल्ली)
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