..ताकि खेती बने मुनाफे का सौदा
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :08 Jun 2015 5:18 AM (IST)
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इस बात से हम भलिभांति परिचित हैं कि हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है. लेकिन आज हमारे देश में किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है. महंगे खाद-बीज, कहीं बारिश कहीं ओला कहीं सूखा, महंगा कर्ज आज किसानों की सबसे बड़ी दुखती रगें हैं. इन सब से बच भी गये तो केंद्र सरकार जो […]
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इस बात से हम भलिभांति परिचित हैं कि हमारा भारत एक कृषि प्रधान देश है. लेकिन आज हमारे देश में किसानों की स्थिति दयनीय बनी हुई है. महंगे खाद-बीज, कहीं बारिश कहीं ओला कहीं सूखा, महंगा कर्ज आज किसानों की सबसे बड़ी दुखती रगें हैं.
इन सब से बच भी गये तो केंद्र सरकार जो भूमि अधिग्रहण बिल लाने की जिद कर रही है, उससे किसानों की जमीन भी उनसे छिनने वाली है. खेती में घटते मुनाफे की वजह से किसान की आर्थिक स्थिति पहले ही कमजोर हो गयी है.
इन सारी वजहों से देश का अन्नदाता खून के आंसू रोने के लिए मजबूर है. राजनीतिक पार्टियां उनके जख्म भरने के बजाय उन्हें और गहरा करने पर तुली हुई हैं. केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर कुछ ऐसा उपाय निकालें कि खोती-किसानी मजबूरी का काम न होकर मुनाफे का सौदा बने.
दिनेश श्रीवास्तव, गोड्डा
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