जरूरत पड़े तो बेईमानी भी चलेगी

बात दो-चार दिन पहले की है. दिन के 11 बजे थे और मैं एक बैंक की एक शाखा में पासबुक अद्यतन के लिए लंबी कतार में लगा था. इस कतार में जहां कुछ वृद्धजन थे, जो लगातार खड़े रहने में अक्षम थे, तो वहीं 20-30 की उम्रवाले कुछ नौजवान भी थे जिनमें कतार तोड़ कर […]
बात दो-चार दिन पहले की है. दिन के 11 बजे थे और मैं एक बैंक की एक शाखा में पासबुक अद्यतन के लिए लंबी कतार में लगा था. इस कतार में जहां कुछ वृद्धजन थे, जो लगातार खड़े रहने में अक्षम थे, तो वहीं 20-30 की उम्रवाले कुछ नौजवान भी थे जिनमें कतार तोड़ कर आगे जाने की अजीब व्यग्रता थी.
इतने में हमारे आगे खड़ी एक संभ्रांत दिखनेवाली महिला ने एक ऐसी तरकीब निकाली जिससे उनका काम कुछ मिनटों में हो गया.
ताज्जुब की बात तो यह थी कि उनका विरोध करने के बदले इस अपार सफलता पर उन्हें बधाई दी जा रही थी. निश्चित ही ईमानदारी से तो यह संभव न था. बैंक की संवेदनहीनता के बाद जन सामान्य की संवेदनहीनता से मन खिन्न हो गया. कितना अजीब है कि हम दूसरे से ईमानदारी की अपेक्षा तो करते हैं लेकिन अपना काम आने पर बेइमानी में पीछे नहीं रहते हैं.
प्रणव प्रकाश, ई-मेल से
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




