सुरक्षा का भरोसा होगा, तभी विकास

अभियंता दिवस पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के इंजीनियरों को निर्भीक होकर काम करने को कहा है. लेकिन, यहां अहम है कि नक्सलियों की धमकी के बाद कई दफा इंजीनियर काम करना बंद कर देते हैं. डर के साये में ये इंजीनियर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाते हैं. पंचायत भवनों व […]
अभियंता दिवस पर झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य के इंजीनियरों को निर्भीक होकर काम करने को कहा है. लेकिन, यहां अहम है कि नक्सलियों की धमकी के बाद कई दफा इंजीनियर काम करना बंद कर देते हैं. डर के साये में ये इंजीनियर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में नहीं जाते हैं.
पंचायत भवनों व सड़कों का निर्माण रुक जाता है. इनकी सुरक्षा की जिम्मेवारी कौन लेगा? मुख्यमंत्री का यह कहना कि आज नहीं तो कल सबको मरना है. यह सत्य है, पर इस सच के सहारे कोई जीने की इच्छा नहीं छोड़ देता है. कार्यक्षेत्र में उचित वातावरण बनाया जाये, तो निश्चित रूप से इंजीनियर अपनी दक्षता से काम करेगा.
वहीं मुख्यमंत्री ने इंजीनियरों को जो घुट्टी पिलायी है, उससे निश्चित रूप से काम में सुधार होगा. बावजूद इसके यहां के इंजीनियरों को प्रोत्साहन की जरूरत है. साथ ही उन्हें और ज्यादा दक्ष बनाने के लिए विदेशों में प्रशिक्षण देने की बात कही है. यह जरूरी भी है.
राज्य के विकास की रूपरेखा तय करने की जिम्मेवारी इंजीनियरों पर भी होती है. राज्य की आधारभूत संरचना तय समय पर गुणवत्तापूर्ण बनेगी, तो पैसे व समय दोनों की बचत होगी. इस राज्य में अक्सर देखा जाता है कि योजनाएं समय पर पूरी नहीं हो पाती हैं. इसका खमियाजा सरकार को उठाना पड़ता है.
योजना पर लागत खर्च बढ़ जाता है. सरकार की इस उक्ति की सराहना करनी चाहिए कि आइएएस, आइपीएस व इंजीनियर के बीच परस्पर सहयोग की जरूरत है. आज हालत यह है कि आइएएस इंजीनियरों को अलग तरीके से देखते हैं. यह गलत है. हालांकि इसके लिए कुछ इंजीनियर भी दोषी है. योजनाओं का डीपीआर तैयार करना हो या प्राक्कलन इन सबमें घपला कर दिया जाता है.
जरूरत से अधिक राशि का खर्च दिखाया जाता है. इसके बाद योजना में कमीशन का खेल चलता है. इस सबसे राज्य के राजस्व का घाटा होता है. कहीं–कहीं तो नेता–प्रशासन व इंजीनियर के बीच इतना परस्पर संबंध रहता है कि योजना पर लागत खर्च व कमीशन पहले से तय कर लिया जाता है. इसके बाद प्राक्कलन बनता है. यह गलत है. राज्य का विकास चाहिए तो इंजीनियरों को भी अपनी जिम्मेवारी समझनी होगा. साथ ही अपनी छवि सुधारने की कोशिश करनी होगी.
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