गरीबों का मजाक उड़ाती सरकार

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 रुपये कमानेवाला ग्रामीण और 33 रुपये से अधिक कमानेवाला शहरी गरीब नहीं है. कमरतोड़ महंगाई को कम करने में नाकाम रही सरकार ऐसी भ्रामक रिपोर्टो से अपनी पीठ थपथपाती है. चुनावी वर्ष में सरकार ने एक ही झटके में 15 फीसदी गरीब कम कर दी. यह चमत्कार तेंदुलकर फार्मूले के […]
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 28 रुपये कमानेवाला ग्रामीण और 33 रुपये से अधिक कमानेवाला शहरी गरीब नहीं है. कमरतोड़ महंगाई को कम करने में नाकाम रही सरकार ऐसी भ्रामक रिपोर्टो से अपनी पीठ थपथपाती है. चुनावी वर्ष में सरकार ने एक ही झटके में 15 फीसदी गरीब कम कर दी. यह चमत्कार तेंदुलकर फार्मूले के आधार पर हुआ है.
आंकड़ों में फेरबदल करना सरकार के लिए सहज हो सकता है, पर सच्चाई कुछ और है. कुपोषण से संबंधित विभिन्न अध्ययनों का सार यही है कि देश के 43 फीसदी बच्चे कुपोषण के शिकार हैं. ग्रामीण इलाकों में 48 फीसदी बच्चों का वजन उनकी उम्र की तुलना में बहुत कम है. ग्लोबल हंगर इंडेक्स की 2010 में 84 विकासशील देशों की रिपोर्ट में हमारा देश 67वें स्थान पर था. इसमें श्रीलंका 39वें, पाकिस्तान 52वें और नेपाल 56वें स्थान पर था.
रितेश कुमार दुबे, कतरास
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए










