ऐसा नया प्रखंड बनाने से क्या लाभ?

Published at :13 Sep 2013 2:16 AM (IST)
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ऐसा नया प्रखंड बनाने से क्या लाभ?

तीन साल पहले पलामू में एक प्रखंड बना. नाम है पिपरा. आज तक न तो वहां प्रखंड कार्यालय बना और न ही वहां थाना है. स्थिति यह है कि एफआइआर दर्ज कराने के लिए 27 किलोमीटर दूर हरिहरगंज थाना जाना पड़ता है. प्रखंड कार्यालय का काम भी हरिहरगंज से चलता है. सवाल यह उठता है […]

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तीन साल पहले पलामू में एक प्रखंड बना. नाम है पिपरा. आज तक न तो वहां प्रखंड कार्यालय बना और न ही वहां थाना है. स्थिति यह है कि एफआइआर दर्ज कराने के लिए 27 किलोमीटर दूर हरिहरगंज थाना जाना पड़ता है. प्रखंड कार्यालय का काम भी हरिहरगंज से चलता है.

सवाल यह उठता है कि नये राज्य, नये प्रमंडल, नये जिले, नये अनुमंडल, नये प्रखंड, नये थाना बनते क्यों हैं? इसलिए ताकि गवर्नेस बेहतर तरीके से चल सके और जनता को अपने काम के लिए दूर नहीं जाना पड़े. अगर एफआइआर के लिए हरिहरगंज ही जाना पड़ता है, तो ऐसा थाना रहे या नहीं, क्या फर्क पड़ता है? अगर प्रखंड कार्यालय में काम कराने के लिए हरिहरगंज ही जाना पड़ता है, तो फिर पिपरा के प्रखंड बनने का लाभ क्या है? क्या नाम के लिए प्रखंड है, नाम के लिए थाना है? जनता का पैसा तो खर्च हो ही रहा है, आने-जाने में उसका समय तो बर्बाद हो ही रहा है, सरकार का पैसा भी खर्च हो रहा है.

घटनाएं घट रही हैं पिपरा या इसके आसपास. पुलिस को सूचना मिलती भी है तो उसे हरिहरगंज से आने में समय लगेगा. इन्हीं परेशानियों को दूर करने के लिए तो पिपरा को प्रखंड बनाया गया था. ऐसा लगता है कि बिना किसी ठोस योजना के इस प्रखंड का निर्माण किया गया था. अगर प्रखंड बनाया है, तो तय होना चाहिए था कि कहां और कब तक बनेगा प्रखंड कार्यालय, थाना कहां बनेगा? न तो उस समय तय हुआ और न अभी तक. किसकी जिम्मेवारी है इसे बनाने की? क्या करते हैं संबंधित क्षेत्र के सांसद-विधायक? लगता है कि पूरा सिस्टम ही फेल है.

किसी को चिंता नहीं. पिपरा उग्रवाद प्रभावित क्षेत्र है. हो सकता है कि वरिष्ठ अधिकारियों के मन में यह बात हो कि अगर प्रखंड कार्यालय, थाना वहां बन गया, तो वहां जाना पड़ेगा, रहना पड़ेगा. बेहतर है कि बने ही नहीं. अगर ऐसी बात है तो गंभीर मामला है. अफसर अब कह रहे हैं कि जल्द बन जायेगा? तीन साल तक जमीन तक तय नहीं कर सके. यह शुद्ध लापरवाही है. जनता विवश है और कुछ बोल नहीं पाती. यही कारण है कि कागज पर पिपरा प्रखंड बना है. अगर जोरदार आवाज उठे, जनता सड़कों पर आ जाये, तो शासन को बाध्य होकर उनकी जायज मांग को मानना ही पड़ेगा.

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