हादसों से सबक सीखना भी जरूरी

शिकोह अलबदर प्रभात खबर, रांची हाल ही में, मैं एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था. रात में ऑफिस से घर लौटने के क्रम में सड़क पर सामने से आती एक गाड़ी की रोशनी की चमक के कारण बीच सड़क पर पड़े ईंट के टुकड़े को नहीं देख सका. गाड़ी और खुद को संभाल पाने […]
शिकोह अलबदर
प्रभात खबर, रांची
हाल ही में, मैं एक सड़क दुर्घटना का शिकार हुआ था. रात में ऑफिस से घर लौटने के क्रम में सड़क पर सामने से आती एक गाड़ी की रोशनी की चमक के कारण बीच सड़क पर पड़े ईंट के टुकड़े को नहीं देख सका.
गाड़ी और खुद को संभाल पाने से पहले मैं गिर गया. पास खड़े युवाओं ने मेरी मदद की, लेकिन पैर में चोट इतनी थी कि मैं गाड़ी चलाने की स्थिति में नहीं था.
हिम्मत बटोर कर किसी तरह घर पहुंचा. अगले दिन डॉक्टर से मिलने पर उन्होंने बताया कि मैं भाग्यशाली हूं कि अधिक चोट नहीं लगी. उन्होंने कुछ दवाइयां दीं और आराम करने को कहा. मेरी हमेशा से आदत रही है कि जब भी मैं किसी सड़क पर ईंट या पत्थर पड़ा देखता हूं, थोड़ा समय देकर उसे हटा देना जरूरी समझता हूं. क्योंकि पत्थर देखते ही मेरे दिमाग में यह ख्याल आता है कि यह किसी बड़े हादसे की वजह बन सकता है.
मनोवैज्ञानिक भाषा में इसे ‘एक्सिडेंटल माइंड’ भी कहते हैं. यानी ऐसा दिमाग जो आसन्न दुर्घटनाओं के बारे में सोचता है. लेकिन मुङो स्वयं पर हंसी भी इस बात की आती है कि ऐसी ही एक दुर्घटना का शिकार मैं खुद हो गया. खैर, जिदंगी में ऐसी घटनाओं से सबक लिया जाना जरूरी होता है.
इस घटना का जिक्र करने का मेरा उद्देश्य यह है कि हममें से ही कई लोग बदकिस्मती से सड़क दुर्घटनाओं में अपनी जान गंवा देते हैं. जो भाग्यशाली होते हैं वे जीवित बच जाते हैं, पर गंभीर रूप से घायल हो कर तकलीफ से नहीं बच पाते.
ऐसे में हमें यह जानना जरूरी होता है कि ऐसी दुर्घटनाओं से क्या सबक लिया जाये. एक बात जो हाल ही मेरी जानकारी में आयी कि चीन की आबादी भारत से अधिक है और चीन में भारत से अधिक मोटर गाड़िया भी हैं, लेकिन भारत के मुकाबले वहां सड़क दुर्घटनाओं की दर आधी है.
सवाल यह है कि हमारे पड़ोसी देश में ऐसे कौन से नियम-कानून हैं जिससे वहां दुर्घटनाओं की संख्या हमारे देश की तुलना में कम है. भारत में रोज 377 लोगों की मृत्यु सड़क हादसों में होती है. यह कोई छोटा आंकड़ा नहीं है. क्या सड़क दुर्घटनाएं सिर्फ तेज गति के कारण होती हैं. ऐसा नहीं है. हमारे यहां की सड़कें भी दुर्घटनाओं का बहुत बड़ा कारण हैं.
सड़कों का नवीनतम वैज्ञानिक तरीकों से नहीं बनना, सड़कों पर अकारण बड़े गड्ढों का होना भी दुर्घटनाओं का कारण बनते हैं. शहर में पिछले कुछ दिनों से यातायात के नियमों को पालन कराने के लिए ट्रैफिक पुलिस द्वारा जोरदार अभियान चलाया जा रहा है. हाल यह है कि यातायात के नियमों का पालन करने संबंधी शपथ लेने के कुछ मिनटों बाद ही इसे तोड़ भी दिया जाता है.
इस मानसिकता को समझने की भी जरूरत है. आवश्यकता महज एक अभियान की नहीं है, बल्कि दुर्घटनाओं के विभिन्न पक्षों को जानने की है. क्या सड़क बेहतर हो तो दुर्घटनाओं में कमी लायी जा सकती है? क्या सड़कों पर आने-जाने के लिए चौड़ी सड़कों की आवश्यकता नहीं है. लेकिन इन सब बिंदुओं पर सरकारी तंत्र में बैठे लोग न जाने तरजीह क्यों नहीं देते, चिंतनीय है.
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