बंद इकाइयों की जमीन क्यों नहीं लेते?

Published at :15 May 2015 5:30 AM (IST)
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बंद इकाइयों की जमीन क्यों नहीं लेते?

इस समय भूमि अधिग्रहण बिल पर पूरे देश में हाय-तौबा मची है, लेकिन देश में बंद पड़े कल-कारखानों की ओर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है. ये ऐसे कल-कारखाने हैं, जिन्हें उनके दिवालियापन की वजह से दोबारा चालू करना संभव नहीं है. सरकार किसानों की भूमि अधिगृहीत करने के बजाय इन बंद पड़े […]

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इस समय भूमि अधिग्रहण बिल पर पूरे देश में हाय-तौबा मची है, लेकिन देश में बंद पड़े कल-कारखानों की ओर किसी का भी ध्यान नहीं जा रहा है. ये ऐसे कल-कारखाने हैं, जिन्हें उनके दिवालियापन की वजह से दोबारा चालू करना संभव नहीं है.
सरकार किसानों की भूमि अधिगृहीत करने के बजाय इन बंद पड़े कल-कारखानों की जमीन को अधिगृहीत क्यों नहीं कर लेती?
इन कारखानों की जमीन अधिगृहीत करने पर बहुत ही कम समय और लागत से ही नये उद्योगों की शुरुआत की जा सकती है. साथ ही, किसी किसान को उसकी पैतृक स्थान से विस्थापित भी नहीं होना पड़ेगा. बंगाल, बिहार और झारखंड में कई ऐसे कारखाने हैं, जो दशकों से बंद पड़े हैं.
इन कारखानों की जमीनों को लेकर नयी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की जा सकती है. इसके लिए सबसे अच्छा तरीका यह होना चाहिए कि जिस राज्य में नये उद्योगों को स्थापित करना है, वहां के बंद कारखानों का सर्वेक्षण करा लिया जाये. उसके आधार पर उनकी जमीनों को अधिगृहीत किया जाना चाहिए. सरकार को इस पर भी ध्यान देना होगा कि देश में रोजाना कृषि योग्य भूमि की कमी होती जा रही है.
यदि किसानों की भूमि को औद्योगिक इकाइयों को स्थापित करने के लिए अधिगृहीत कर लिया गया, तो कृषि योग्य भूमि में और भी कमी होगी. दुनिया भर में स्टील किंग के नाम से विख्यात लक्ष्मी मित्तल ने इस्पात उद्योग में प्रवेश करने के पहले सिर्फ एक ही कारखाना स्थापित करने के लिए भूमि का अधिग्रहण किया.
इसके बाद उन्होंने जितने भी कारखाने स्थापित किये, उनमें से ज्यादातर बंद पड़ी इकाइयों को अधिगृहीत करने के बाद ही किया है. इससे न तो किसानों की जमीन नुकसान हुआ और नये कारखाने भी स्थापित हो गये.
स्वपन कुमार सिंह, जादूगोड़ा, पू सिंहभूम
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