ऐसे जनाक्रोश से किसी का भला नहीं

Published at :27 Aug 2013 4:56 AM (IST)
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ऐसे जनाक्रोश से किसी का भला नहीं

ग्रामीणों ने 14 ट्रक फूंके मका–रामपुरहाट मुख्य मार्ग पर सड़क दुर्घटना के बाद एक ऐसा जनाक्रोश देखने को मिला, जिससे प्रशासन व ट्रक मालिक दोनों सकते में हैं. ग्रामीणों ने सड़क दुर्घटना में महिला की मौत के विरोध में उस रास्ते से गुजर रहे 14 ट्रकों को फूंका डाला. इससे करोड़ों के नुकसान का अनुमान […]

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ग्रामीणों ने 14 ट्रक फूंके

मकारामपुरहाट मुख्य मार्ग पर सड़क दुर्घटना के बाद एक ऐसा जनाक्रोश देखने को मिला, जिससे प्रशासन ट्रक मालिक दोनों सकते में हैं. ग्रामीणों ने सड़क दुर्घटना में महिला की मौत के विरोध में उस रास्ते से गुजर रहे 14 ट्रकों को फूंका डाला. इससे करोड़ों के नुकसान का अनुमान है.

लेकिन, सवाल यह है कि यह नुकसान किसका है? ट्रक मालिक बीमा कंपनी से अपने नुकसान की भरपाई शायद कर लें, लेकिन अब इस रास्ते से होकर गुजरनेवाले सभी तरह के वाहन एक डर के साये में आवाजाही करेंगे. एक तो दुर्घटना अक्सर अनजाने में होती है. इसके अलावा जिस वाहन से यह दुर्घटना हुई है, उसे पहचान कर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए.

लेकिन ग्रामीणों ने जिस किसी के नेतृत्व में यह कदम उठाया, यह किसी भी सभ्य शिक्षित समाज के लिए ठीक नहीं है. इसमें 14 ट्रक जला दिये गये, जिन्होंने दुर्घटना नहीं की. इनका क्या कसूर था? करे कोई, भरे कोई के अंदाज में अंजाम दी गयी इस घटना में दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए. आक्रोश में इस तरह का कदम उठाने से आम जनता का कभी भला नहीं हुआ है.

यह तो वही हुआ कि कोई राजनीतिक पार्टी अपनी राजनीति की रोटी सेंकने के लिए बाजार बंद बुलाती है. इसमें आम लोगों की परेशानी दरकिनार कर दी जाती है. यह दुखद है कि सड़क हादसे में सुबह की सैर पर निकली एक महिला की जान चली गयी. इसके लिए ट्रक ड्राइवर कहीं कहीं दोषी है.

झारखंड की सड़कों पर गाड़ियां नियमों की धज्जी उड़ाती हुईं तय गति सीमा से अधिक रफ्तार में चलती हैं. सबसे बड़ी बात यह है कि ऐसेऐसे लोगों को ड्राइविंग लाइसेंस निर्गत कर दिया जाता है, जो मैट्रिक तक पास नहीं हैं. खास कर ट्रक ड्राइवर. परिवहन विभाग को ऐसे मनमानेपन पर रोक लगानी चाहिए. नहीं तो नतीजा यही होगा. सड़क दुर्घटनाएं होती रहेंगी और जनता का आक्रोश सड़क पर फूटता रहेगा.

पत्ताबाड़ी की इस घटना के बाद परिवहन विभाग को सजग होना चाहिए. सरकार को भी इसकी जवाबदेही लेनी चाहिए कि बगैर जांचेपरखे ड्राइविंग लाइसेंस कैसे निर्गत हो जाता है.

झारखंड के कई जिले में जिला परिवहन विभाग के पास अपने परिसर हैं, जिनमें लाइसेंस निर्गत करने से पहले ड्राइवर की सही तरीके से जांच हो. ऐसी सड़क दुर्घटनाओं के मूल में जाने की जरूरत है. वहीं जनता को भी आक्रोश पर काबू रखना चाहिए. किसी के बहकावे में आकर ऐसी गलती करें, जिसके बाद फिर पछताना पड़े.

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