डर कर घर में बैठने से कुछ नहीं होगा

Published at :26 Aug 2013 2:03 AM (IST)
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डर कर घर में बैठने से कुछ नहीं होगा

।।दक्षा वैदकर।।-प्रभात खबर, पटना-मुंबई में महिला फोटो पत्रकार के साथ हुए गैंग रेप ने कामकाजी महिलाओं में डर पैदा कर दिया है. महिलाएं यह समझने लगी हैं कि यदि कुछ बनना है, तो डर कर घर में बैठने से कुछ नहीं होगा. लेकिन फिर भी एक डर तो हमेशा बना रहता है. वह कितने भी […]

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।।दक्षा वैदकर।।
-प्रभात खबर, पटना-
मुंबई में महिला फोटो पत्रकार के साथ हुए गैंग रेप ने कामकाजी महिलाओं में डर पैदा कर दिया है. महिलाएं यह समझने लगी हैं कि यदि कुछ बनना है, तो डर कर घर में बैठने से कुछ नहीं होगा. लेकिन फिर भी एक डर तो हमेशा बना रहता है. वह कितने भी बड़े ऑफिस में काम कर ले, फील्ड वर्क कर ले, बाइक चला ले, जींस और टी-शर्ट पहन ले, बड़े निर्णयों में अपना सुझाव दे दे, पर यह समाज उसे बार-बार याद दिला ही देता है कि वह महिला है. मुंबई की घटना ने मुङो एक पुरानी पत्रकार दोस्त की याद दिला दी. हम दोनों ने लगभग साथ-साथ पत्रकारिता शुरू की थी. मैं सॉफ्ट स्टोरीज के सेक्शन में गयी, लेकिन उसने स्टिंग ऑपरेशन वाली पत्रकारिता को रोमांचक समझ कर उसमें जाना सही समझा. दो हफ्तों में उसकी तीन खबरें नाम के साथ छप चुकी थीं. उसका आत्मविश्वास चरम पर था.

वह जिस तरह की स्टोरी करती थी, उसका एक हिस्सा यह भी होता था कि जिस पर आरोप लगाये जा रहे हैं उससे पत्रकार सीधे सवाल-जवाब करे. सारे सबूत जुटाने के बाद उससे डंके की चोट पर पूछे कि आप पर फलां-फलां इल्जाम हैं, इस पर आपका क्या कहना है? मेरी मित्र ने भी एक पुलिसवाले के खिलाफ ऐसे ही सारे सबूत जुटाये और उसके पास जा पहुंची. उसने बड़े आत्मविश्वास के साथ सवाल दागने शुरू किये. पुलिसवाला आग-बबूला हो गया. उसने गुस्से में उठ कर दरवाजे की चिटकिनी लगायी और पत्रकार पर टूट पड़ा. बड़ी मुश्किल से वह भागने में सफल हो पायी. ऑफिस पहुंच कर उसने रोते हुए सारी बात बतायी. उस पुलिसवाले का क्या हुआ, यह अलग बात है. पर मेरी उस दोस्त ने उसी दिन पत्रकारिता छोड़ दी.

ऐसी अनेक लड़कियां हैं, जो बाहर लोगों के व्यवहार के चलते काम छोड़ देती हैं. हालांकि कुछ फील्ड में रह कर इतनी दक्ष भी हो जाती हैं कि खुद को बचाते हुए काम कर लेती हैं. मार्केटिंग में कार्यरत एक दोस्त ने मुङो बताया कि जब भी उसे किसी क्लाइंट के घर जाकर किसी कागज पर दस्तखत लाना होता है, वह अपने पुरुष साथी को बाहर ही छोड़ देती है. बातों में फुसला कर दस्तखत करवा लेने के बाद वह पुरुष साथी को मिसकॉल कर देती है और वह झट से दरवाजा पीटने लग जाता है. इस तरह वह काम भी कर लेती है और खुद को सुरक्षित घर से निकाल लाती है.

स्त्री-विरोधी पुरुषों से बचने व इन्हें सबक सिखाने के लिए महिलाओं को ही चालाक बनना होगा. इन दिनों फेसबुक पर स्टेफी ग्राफ का एक वीडियो खूब चल रहा है, जिसमें बेहद दबाव में खेल रही स्टेफी से एक दर्शक चिल्ला कर पूछता है ‘स्टेफी, विल यू मैरी मी?’ और स्टेफी बिना ध्यान भंग किये, मुस्कुरा कर जवाब देती है ‘हाउ मच मनी डू यू हैव?’

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