दिल्ली विधानसभा चुनाव के फलितार्थ

Published at :16 Feb 2015 5:12 AM (IST)
विज्ञापन
दिल्ली विधानसभा चुनाव के फलितार्थ

लोकसभा चुनावों के दौरान अपनी सभाओं में अपने भाषणों से तालियां बटोरनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे वोट के रूप में तब्दील किया, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभाओं के दौरान उनके भाषणों पर बजनेवाली तालियां वोट में बदली नहीं जा सकीं. इसका अर्थ यह है कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये भाषणों […]

विज्ञापन

लोकसभा चुनावों के दौरान अपनी सभाओं में अपने भाषणों से तालियां बटोरनेवाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उसे वोट के रूप में तब्दील किया, लेकिन दिल्ली विधानसभा चुनाव में सभाओं के दौरान उनके भाषणों पर बजनेवाली तालियां वोट में बदली नहीं जा सकीं. इसका अर्थ यह है कि इस चुनाव में प्रधानमंत्री द्वारा दिये गये भाषणों में अहंकार की बू आती रही और मतदाताओं की सोच के अनुरूप वह खरे नहीं उतर सके.

आज भारत की जनता साठ के दशक वाली नहीं रह गयी है, जो सिर्फ बातों के जाल में आकर फंस जाये. आज के लोग अधिक सतर्क और मेहनतकश हैं. जिस तरह उनके काम के बाद नतीजे भी तुरंत देखे जाते हैं, वैसे ही वे भी सरकारी घोषणाओं के नतीजे देखना चाहते हैं. यही वजह रही कि दिल्ली के चुनावों में भाषणों की भिन्नता के कारण हार मिली.

डॉ अरुण सज्जन, जमशेदपुर

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola