वोट बैंक की फिक्र में विकास को ‘ना’

Published at :10 Oct 2014 12:54 AM (IST)
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वोट बैंक की फिक्र में विकास को ‘ना’

झारखंड में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या है. लेकिन इससे मुक्ति का कोई रास्ता नजर नहीं आता. राजधानी हो या अन्य शहर, कहीं भी सड़कों को चौड़ा करने, फ्लाईओवर बनाने, अतिक्रमण हटाने का गंभीर प्रयास नहीं हो रहा है. राजधानी रांची में जब नया मास्टर प्लान बन रहा है, तो पार्षद सड़कों को चौड़ा करने का […]

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झारखंड में ट्रैफिक जाम बड़ी समस्या है. लेकिन इससे मुक्ति का कोई रास्ता नजर नहीं आता. राजधानी हो या अन्य शहर, कहीं भी सड़कों को चौड़ा करने, फ्लाईओवर बनाने, अतिक्रमण हटाने का गंभीर प्रयास नहीं हो रहा है.

राजधानी रांची में जब नया मास्टर प्लान बन रहा है, तो पार्षद सड़कों को चौड़ा करने का विरोध कर रहे हैं. पार्षदों को पता है कि इसके लिए सड़क के दोनों ओर के मकानों-दुकानों को तोड़ना होगा. जिनके मकान-दुकान टूटेंगे, वे नाराज होंगे.

फिर अगले चुनाव में वोट नहीं देंगे. विधायक भी ऐसा ही सोचते हैं. जब अतिक्रमण हटने लगता है, तो धरना-प्रदर्शन आरंभ कर देते हैं. विधायकों-पार्षदों को वोट बैंक से ऊपर उठना होगा. अगर विकास चाहिए तो 20 लाख लोगों की सुविधा के लिए एक हजार को प्रभावित तो होना ही पड़ेगा. हर साल हजारों गाड़ियां सड़कों पर उतर रही हैं. कड़े फैसले लेने का वक्त आ गया है.

देश के कई राज्यों में ट्रैफिक व्यवस्था अच्छी है क्योंकि वहां सड़कें चौड़ी हैं. ये सड़कें शुरू से चौड़ी नहीं थीं. समय की मांग के अनुसार इन्हें चौड़ा किया गया. यह तभी हो सकता है जब राजनीतिज्ञों में इच्छाशक्ति हो, जो झारखंड में नहीं दिखती है. लोग घंटों जाम में फंसे रहें, यह उन्हें मंजूर है, लेकिन सड़कें चौड़ी नहीं होने देंगे. फ्लाइओवर भी नहीं बनने देंगे, नया शहर भी नहीं बसने देंगे. इसका अर्थ तो यही है कि जैसा चल रहा है, हमारे नेता उसी में खुश हैं. जमशेदपुर, धनबाद, हजारीबाग में भी यही स्थिति है.

40-50 साल पहले सड़क जितनी चौड़ी थी, आज भी उतनी ही है. बल्कि अतिक्रमण से और सिकुड़ गयी है. अतिक्रमण तभी हटता है जब हाइकोर्ट का आदेश आता है. बड़े नेताओं को फर्क नहीं पड़ता क्योंकि जब वे निकलते हैं तो सायरन बजाती हुई गाड़ियां उनके लिए रास्ता बनाती हैं. इसलिए विधायक-पार्षद इस बात पर गौर करें कि सड़कों को चौड़ा करने में अड़ंगा लगा कर वे किसी का भला नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपने राज्य का भविष्य खराब कर रहे हैं. जब यही नेता दूसरे बड़े शहरों में या विदेश जाते हैं तो वहां से लौटने पर तरह-तरह के बयान आते हैं. लेकिन जब शहर को ठीक करने का, संवारने का मौका आता है तो इनका दूसरा चेहरा नजर आता है.

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