जवाब के साथ शांति की राह भी तलाशें

Published at :09 Oct 2014 5:16 AM (IST)
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जवाब के साथ शांति की राह भी तलाशें

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से लगती सीमा पर इस माह पाक सेना की गोलीबारी में भारत के सात लोग मारे जा चुके हैं. सीमा पर जीवन और उनकी जीविका के साधन पर पड़ती चोट के बीच नागरिकों का सुरक्षित ठिकानों की खोज में पलायन जारी है. फिलहाल पाकिस्तान की सैन्य उकसावे की कार्रवाई का भारत मुंहतोड़ […]

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जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान से लगती सीमा पर इस माह पाक सेना की गोलीबारी में भारत के सात लोग मारे जा चुके हैं. सीमा पर जीवन और उनकी जीविका के साधन पर पड़ती चोट के बीच नागरिकों का सुरक्षित ठिकानों की खोज में पलायन जारी है. फिलहाल पाकिस्तान की सैन्य उकसावे की कार्रवाई का भारत मुंहतोड़ जवाब दे रहा है.

हमारे गृहमंत्री और सेनाध्यक्ष मुंहतोड़ जवाब देने के अपने रुख पर कायम हैं और ऐसा नहीं लगता कि रक्षामंत्री के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुखों की हुई बैठक में गृहमंत्री के रुख से अलग राय रखते हुए मौजूदा समस्या का कोई और समाधान खोजा जायेगा. भारत ने मुंहतोड़ जवाब देने की जो नयी रणनीति अपनायी है, उसका पाकिस्तान को नुकसान भी उठाना पड़ा है. पाकिस्तानी टीवी चैनल वहां की हुकूमत के दबाव में सीमावर्ती इलाकों में जारी गोलीबारी से हो रहे नुकसान की खबरें नहीं दिखा रहे हैं, लेकिन अखबार ‘पाक ट्रिब्यून’ का दावा है कि भारतीय पक्ष से हो रही जवाबी फायरिंग में अब तक आठ पाक नागरिक मारे गये हैं.

अनुमान लगाया जा सकता है कि सीमावर्ती पाकिस्तानी इलाकों में भी नागरिकों का पलायन हो रहा होगा. सैन्य संघर्ष की किसी आपातिक स्थिति में सर्वाधिक आसान समाधान तो यही है कि जो आप पर हमलावर हुआ है, उस पर आप दोगुने वेग से हमलावर हो उठें. लेकिन, यह परंपरागत सूझ भी याद रखी जानी चाहिए कि हिंसा का प्रतिकार प्रतिहिंसा से न तो कभी हुआ है और न ही कभी हो सकता है. देखा यह भी जाना चाहिए कि पाकिस्तान को हो रहे नुकसान से क्या भारत को कोई फायदा हो रहा है?

जवाबी कार्रवाई की भारत की हालिया रणनीति अगर अपने उद्देश्य में कामयाब होती, तो संघर्ष नयी सैन्य चौकियों और रिहायशी इलाकों तक नहीं फैलता. पाकिस्तानी उकसावे के बीच भारत जवाबी कार्रवाई के लिए बाध्य हुआ, यह बात सही है, लेकिन दोनों देशों के बीच सीमा पर तत्काल शांतिपूर्ण स्थिति कायम करना इससे कहीं आगे की बात है और यही दोनों देशों के दूरगामी हित में है. संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने भी यही सलाह दी है. दक्षिण एशिया में शांति व सहअस्तित्व पर आधारित विकास के लिए जरूरी है कि जवाबी कार्रवाई के साथ भारत कूटनयिक संबंधों के सहारे द्विपक्षीय समाधान खोजने की दिशा में भी प्रयास करे.

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