स्वास्थ्य डेटा का संग्रह

Updated at : 13 Jan 2020 6:15 AM (IST)
विज्ञापन
स्वास्थ्य डेटा का संग्रह

जीवन के हर क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है. हमारे देश में, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा समुचित स्वास्थ्य सेवा की पहुंच से दूर है, इस तकनीक के माध्यम से इसके विस्तार की व्यापक संभावना है. इस संबंध में सबसे पहले रोगियों के रिकॉर्ड को संग्रहित करना जरूरी है. यदि […]

विज्ञापन

जीवन के हर क्षेत्र में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल लगातार बढ़ता जा रहा है. हमारे देश में, जहां आबादी का बड़ा हिस्सा समुचित स्वास्थ्य सेवा की पहुंच से दूर है, इस तकनीक के माध्यम से इसके विस्तार की व्यापक संभावना है. इस संबंध में सबसे पहले रोगियों के रिकॉर्ड को संग्रहित करना जरूरी है.

यदि इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड रहेगा, तो रोगी तमाम रिपोर्टों और दस्तावेजों को ढोने की परेशानी से बच सकता है और ऐसे डॉक्टरों से भी इलाज के लिए सलाह लेने में सहूलियत रहेगी, जो कहीं बड़े शहर या अस्पताल में कार्यरत हों. केरल भारत का एकमात्र राज्य बन गया है, जहां ढाई करोड़ से अधिक लोगों का ऐसा रिकॉर्ड बन चुका है और वे किसी भी सरकारी अस्पताल में बिना कोई कागज के जा सकते हैं. इस तरह के प्रयास हर राज्य में होने चाहिए. पिछले साल प्रस्तावित नेशनल डिजिटल हेल्थ ब्लूप्रिंट में भी स्वास्थ्य डेटा के संग्रहण और प्रबंधन का प्रावधान है.

कुछ समय पहले नीति आयोग ने भी उत्कृष्ट स्वास्थ्य प्रणाली विकसित करने के लिए एक रिपोर्ट तैयार की है. यह संतोष की बात है कि स्वास्थ्य सेवा के जानकारों द्वारा और विभिन्न अस्पतालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा के महत्व को समझा जा रहा है, लेकिन रोगियों से जुड़ी सभी जरूरी जानकारियों को डिजिटल तरीके से जमा करने का चलन अभी बहुत ही सीमित है. कई रोगों के अच्छे चिकित्सकों की संख्या भी हमारे यहां कम है और छोटे अस्पतालों में संसाधनों की कमी भी है.

इस अभाव को दूर करने में तकनीक की मदद ली जा जानी चाहिए. देश के 75 फीसदी से ज्यादा इलाज करानेवाले और 60 फीसदी से ज्यादा भर्ती होनेवाले मरीज निजी अस्पतालों में ही जाते हैं. जिस तरह से आयुष्मान भारत समेत विभिन्न योजनाओं में निजी अस्पतालों को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है, उसी तरह से इलेक्ट्रॉनिक डेटा जमा करने के प्रयास में भी इन्हें साथ लेना जरूरी है.

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के इस्तेमाल से अस्पताल जाने या डॉक्टर की जरूरत के बारे में जानना आसान हो जायेगा. जैसा कि नीति आयोग की रिपोर्ट में रेखांकित किया गया है, डिजिटल स्वास्थ्य सेवा के लिए ठोस तंत्र बनाना होगा. इसमें सेवा के साथ वित्तीय पहलुओं का भी एकीकरण होना चाहिए. बीते कुछ सालों से स्वास्थ्य व स्वच्छता के लिए अनेक पहलकदमी हुई है. उसके तहत डिजिटल के मद में भी निवेश किया जाना चाहिए ताकि विभिन्न योजनाओं की उपलब्धियों को स्थायी व प्रभावी बनाया जा सके. टेलीमेडिसिन, रोबोटिक्स और डिजिटल विश्लेषण का दायरा बढ़ता जा रहा है. ऐसे में तकनीक के द्वारा न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशी विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा सकती हैं. इसी तरह से कहीं दूर बैठा कोई सर्जन डिजिटल स्क्रीनों से स्थानीय सर्जन को निर्देशित कर सकता है.

ऐसा सर्जन रोबोटिक्स से ऑपरेशन को भी अंजाम दे सकता है. इन सबके लिए डेटा का संग्रहित होना आधारभूत जरूरत है. उम्मीद है कि केंद्र व राज्य सरकारों के साथ निजी अस्पताल भी इस दिशा में प्रयासरत होंगे.

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola