जान बचाने के लिए जरूरी
Published by : Prabhat Khabar Digital Desk Updated At : 17 Jun 2019 5:48 AM
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पूरे देश में गर्मी का भयानक और भयावह प्रकोप जारी है. आधा जून खत्म हो गया है, लेकिन मानसून का पता नहीं है. दिल्ली, राजस्थान आदि में 48 डिग्री सेल्सियस तापमान से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. बिहार के अकेले पटना और औरंगाबाद जिलों में लगभग 100 लोगों की जानें लू से हो […]
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पूरे देश में गर्मी का भयानक और भयावह प्रकोप जारी है. आधा जून खत्म हो गया है, लेकिन मानसून का पता नहीं है. दिल्ली, राजस्थान आदि में 48 डिग्री सेल्सियस तापमान से लोगों का जीना मुश्किल हो रहा है. बिहार के अकेले पटना और औरंगाबाद जिलों में लगभग 100 लोगों की जानें लू से हो चुकी हैं. लोग अस्पतालों में दम तोड रहे हैं.
यह असामयिक मौत उन गरीबों की हो रही है, जो झुलसाने वाली गर्मी में रोजी-रोटी के लिए बाहर खून-पसीना बहाने को अभिशप्त हैं. यह सब पर्यावरण असंतुलन और जलवायु परिवर्तन के कारण हो रहा है. प्रचंड गर्मी के कारण मस्तिष्क ज्वर से सिर्फ मुजफ्फरपुर में दर्जनों लोगों की जानें चली गयी हैं. प्रकृति के इस कोप को समझने की जरूरत है.
यदि हम सब पर्यावरण और प्रकृति के संरक्षण के प्रति ऐसे ही उदासीन और लापरवाह रहेंगे, तो आने वाले समय में जान-माल का नुकसान और ज्यादा होगा, असामयिक मौतें होंगी. इसलिए प्रदूषण नियंत्रण के लिए ठोस और कड़े फैसले हमें लेने ही होंगे. जान की रक्षा के लिए यह सब हमें करना ही पड़ेगा. इसी में हमारा और हमारे नौनिहालों का जीवन बच सकता है.
युगल किशोर, रांची
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