राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता

Updated at : 15 Apr 2019 5:33 AM (IST)
विज्ञापन
राजनीतिक चंदे की पारदर्शिता

दलों को मिलने वाले चंदे के स्वरूप में थोड़ा-सा परिवर्तन हुआ है. इसे पारदर्शिता की संज्ञा दी जा रही है, मगर ऐसा है नहीं. सुप्रीम कोर्ट के नये आदेश के अनुसार 31 मई तक सभी दलों को बंद लिफाफे में चुनाव आयोग को बताना होगा कि कितने पैसे किसे मिले, लेकिन इससे होगा क्या? सरकार […]

विज्ञापन
दलों को मिलने वाले चंदे के स्वरूप में थोड़ा-सा परिवर्तन हुआ है. इसे पारदर्शिता की संज्ञा दी जा रही है, मगर ऐसा है नहीं. सुप्रीम कोर्ट के नये आदेश के अनुसार 31 मई तक सभी दलों को बंद लिफाफे में चुनाव आयोग को बताना होगा कि कितने पैसे किसे मिले, लेकिन इससे होगा क्या? सरकार के प्रतिनिधि ने तो अदालत में साफ-साफ कह दिया है कि राजनीतिक दलों के हिसाब-किताब से देशवासियों का कुछ लेना-देना ही नहीं है.
बंद लिफाफा वाला हिसाब-किताब मामले को रफा-दफा करने की एक साजिश है.
याद कीजिए, अक्तूबर 2014 में तत्कालीन अटॉर्नी जनरल रोहतगी जी ने बंद लिफाफे में 627 भारतीयों के नाम सौंपे थे, जिनका स्विस बैंकों में अकाउंट है. उसका क्या हुआ? राजनीतिक भ्रष्टाचार का पहला पायदान दलों को मिलने वाला चंदा ही है. व्यापारी किसी को बिना मतलब 10 रुपये भी नहीं देते. अगर वह 10 देता है, तो उससे 100 वसूलता भी है.
जंग बहादुर सिंह, गोलपहाड़ी, जमशेदपुर
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola