हथियार से देश नहीं मानवता नेस्तनाबूद होती है

नाम पाक है, किंतु मक्कारी भी साथ लिये. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण गत वर्ष उरी में 17 भारतीय जवान शहीद हो गये. अब 14 फरवरी के दिन पुलवामा में 40 से अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हुए. जरा भी नहीं सोचा कि 55 करोड़ रुपये इसी भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ डायफर बदलने में […]
नाम पाक है, किंतु मक्कारी भी साथ लिये. पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद के कारण गत वर्ष उरी में 17 भारतीय जवान शहीद हो गये. अब 14 फरवरी के दिन पुलवामा में 40 से अधिक जवान वीरगति को प्राप्त हुए.
जरा भी नहीं सोचा कि 55 करोड़ रुपये इसी भारत ने पाकिस्तान को सिर्फ डायफर बदलने में खर्च कर दिये. पाकिस्तान की आमदनी क्या है, पता नहीं, किंतु नैपकीन तक खरीदने के लिए वह चीन और अमेरिका की तरफ मुंह बाये रहता है.
अन्य देशों से विकास के नाम रुपये मांगकर बम, गोले और हथियार खरीदता है, जबकि उसकी जनता भूखे मर रही है. पाक को इस बात को जानना चाहिए कि कोई हथियार या बम किसी देश को नेस्तनाबूद नहीं करता, बल्कि मानवता को समाप्त करता है.
प्रो सदानंद पॉल, नवाबगंज, मनिहारी (कटिहार)
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