चीन की चुनौती
Published by :Prabhat Khabar Digital Desk
Published at :07 Jan 2019 6:33 AM (IST)
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अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध और आंतरिक परिस्थितियों ने चीन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, किंतु अमेरिका को पीछे छोड़ने और उदारवादी लोकतांत्रिक आदर्शों पर आधारित बहुपक्षीय विश्व-व्यवस्था पर हावी होने की उसकी महत्वाकांक्षा बनी हुई है. ऐसे में चीन को लेकर भारत के सामने अनेक चुनौतियां हैं. हालांकि, 2018 में दोनों देशों […]
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अमेरिका के साथ व्यापार युद्ध और आंतरिक परिस्थितियों ने चीन के लिए मुश्किलें खड़ी कर दी हैं, किंतु अमेरिका को पीछे छोड़ने और उदारवादी लोकतांत्रिक आदर्शों पर आधारित बहुपक्षीय विश्व-व्यवस्था पर हावी होने की उसकी महत्वाकांक्षा बनी हुई है. ऐसे में चीन को लेकर भारत के सामने अनेक चुनौतियां हैं.
हालांकि, 2018 में दोनों देशों के संबंध अच्छे बने रहे तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच सफल बातचीत भी होती रही, पर ऐसा होने के पीछे दो कारण बहुत महत्वपूर्ण हैं- एक, चीन पर व्यापार युद्ध से पैदा हुई समस्याओं का दबाव है और दूसरा, भारतीय नेतृत्व के सामने चुनाव पर ध्यान देने की मजबूरी है.
भारत में चीनी उत्पादों की बड़ी खपत होती है और चीन का इरादा इस बाजार में बढ़ोतरी का है. हाल में भारत आये चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है, ताकि द्विपक्षीय संबंधों को जनमत का आधार मिल सके.
इससे इनकार नहीं किया जा सकता है कि दो देशों के बीच बेहतर रिश्ते बनाने में लोगों के आपसी मेलजोल से बड़ी मदद मिलती है तथा सहयोग के कई रास्ते खुलते हैं, पर हमें इस बात का ध्यान रखना होगा कि चीन की यह कोशिश असंतुलित व्यापार को लेकर भारतीय जनमानस में बैठी चिंताओं को कमजोर करना तो नहीं है? आकलनों की मानें, तो 2018 में चीन ने भारत से 65 अरब डॉलर से अधिक की कमाई की है, जबकि भारत में उसका प्रत्यक्ष विदेशी निवेश दो अरब डॉलर से भी कम है.
अमेरिका के बाद चीन सबसे ज्यादा कमाई भारत से ही करता है. वैसे चीन-अमेरिका व्यापार की मात्रा चीन-भारत व्यापार से बहुत अधिक है, लेकिन चीन के बरक्स भारत का चीन से व्यापार घाटा प्रतिशत के हिसाब से अमेरिका से अधिक है. इस असंतुलन को कम करने के गंभीर प्रयास भी भारत की ओर से नहीं किये गये हैं.
चूंकि हमारी अर्थव्यवस्था घरेलू उपभोग पर टिकी हुई है और उसमें निर्यात का हिस्सा बहुत कम है, इसलिए चीन को भी कमाने का बड़ा मौका मिला है. यदि इस महीने के आखिर में भारत द्वारा अमेरिकी आयात पर भारी शुल्क लगाये जाते हैं, तो इससे भी चीन को फायदा मिल सकता है.
इस साल चीन और भारत समेत 16 देशों के मुक्त व्यापार समझौते पर भी सहमति की उम्मीद है. इसके बाद भारतीय बाजार में चीनी माल की आमद और बढ़ेगी. जैसा कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने चीनी विदेश मंत्री से कहा है, दोनों देशों को व्यापारिक असंतुलन पर तुरंत ध्यान देने की जरूरत है. उन उत्पादों पर अधिक आयात शुल्क लगाये जाने चाहिए, जो घरेलू उद्योगों का नुकसान कर रहे हैं.
इसके साथ ‘मेक इन इंडिया’ जैसी पहलों को नयी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ाया जाना चाहिए. हर साल खरबों रुपये चीन भेज कर हम उसकी आर्थिक और सैनिक ताकत को ही बढ़ा रहे हैं. इस पर ठोस पुनर्विचार की आवश्यकता है.
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