राजभाषा की दशा
Author Prabhat khabar digital desk
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी को उचित स्थान दिलाने के संकल्प के साथ मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने की पुरजोर वकालत की गयी. इस तर्क को बल भी मिलता है क्योंकि आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त रूसी एवं अरबी भाषा बोलने […]
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी को उचित स्थान दिलाने के संकल्प के साथ मॉरीशस में 11वें विश्व हिंदी सम्मेलन का आयोजन किया गया. सम्मेलन में हिंदी को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक भाषा बनाने की पुरजोर वकालत की गयी.
इस तर्क को बल भी मिलता है क्योंकि आधिकारिक भाषा का दर्जा प्राप्त रूसी एवं अरबी भाषा बोलने वालों की संख्या हिंदी बोलने वालों से काफी कम है.
हिंदी की दयनीय स्थिति का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित परीक्षाओं में हिंदी माध्यम के छात्रों की सफलता का प्रतिशत 15% से भी कम है. अंग्रेजी की चकाचौंध के आगे हिंदी कहीं गुम हो गयी है.
आजादी के 70 वर्षों के बाद भी यह अस्तित्व की तलाश में है. आज के इस दौर में अंग्रेजी भाषा ज्ञान एवं रुतबा का मापदंड बन गया है. आज युवा अपनी मातृभाषा एवं राजभाषा से दूर होते जा रहे हैं, तो इसमें कहीं न कहीं पूरे समाज का दोष है. इसलिए हम सब को मिलकर राजभाषा हिंदी के क्रमिक विकास की बारे में सोचना होगा.
मोहम्मद इरफान, वासेपूर,धनबाद
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