हिंसक भीड़ पर दंडात्मक कार्रवाई जरूरी
Updated at : 23 Jul 2018 2:34 AM (IST)
विज्ञापन

लोकतंत्र में आम जनता को विरोध और प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन जब यही भीड़ हिंसक रूप धारण कर किसी की हत्या कर दे या सार्वजनिक संपत्तियों को क्षति पहुंचाये तो यह सामाजिक अपराध समझा जाना चाहिए. भीड़ का उपयोग कर राजनीतिक दल तथा शक्ति संपन्न लोग समाज में दंगा-फसाद करवा कर अपना […]
विज्ञापन
लोकतंत्र में आम जनता को विरोध और प्रदर्शन करने का अधिकार प्राप्त है, लेकिन जब यही भीड़ हिंसक रूप धारण कर किसी की हत्या कर दे या सार्वजनिक संपत्तियों को क्षति पहुंचाये तो यह सामाजिक अपराध समझा जाना चाहिए.
भीड़ का उपयोग कर राजनीतिक दल तथा शक्ति संपन्न लोग समाज में दंगा-फसाद करवा कर अपना काम निकलवाते हैं और सोचनेवाली बात तो यह है कि भीड़ पर कोई दंडात्मक कार्रवाई भी नहीं की जा सकती है.
इस नियम में सुधार करने की सख्त जरूरत है, क्योंकि भीडतंत्र कब आपराधिक रूप धारण कर ले कहना मुश्किल है. सुप्रीम कोर्ट ने हिंसक भीड़ पर शिंकजा कसते हुए किसी भी अप्रिय वारदात के एवज में कार्रवाई व दंड देने का निर्णय लिया है, जो स्वागत योग्य है. जनतंत्र में विरोध जरूरी है, लेकिन एक सीमा में रहकर.
सत्यम भारती, वनद्वार (बेगूसराय)
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




