अब भी वक्त है
Updated at : 18 Jun 2018 12:46 AM (IST)
विज्ञापन

देश के तीन राज्यों में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति ने वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. असम,मणिपुर और त्रिपुरा के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं और स्थिति निरंतर भयावह होती जा रही है. करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है. असम में तकरीबन चार लाख लोग प्रभावित हुए हैं. अबतक […]
विज्ञापन
देश के तीन राज्यों में उत्पन्न बाढ़ की स्थिति ने वहां का जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है. असम,मणिपुर और त्रिपुरा के कई इलाके बाढ़ की चपेट में हैं और स्थिति निरंतर भयावह होती जा रही है. करीब दो दर्जन लोगों की मौत हो चुकी है. असम में तकरीबन चार लाख लोग प्रभावित हुए हैं.
अबतक के आंकड़ों के अनुसार 1912 हेक्टेयर की फसलें बर्बाद हो चुकी हैं. नदियों उफन रही हैं. नदियों का यह दृश्य इससे पहले कभी नहीं देखा गया. इस तबाही की वजह हम खुद भी हैं. पर्यावरण को हमने नुकसान पहुंचाया और जंगलों को खत्म कर दिया. नदियों में गाद भर गया है, जो हमारी देन है. कल-कारखाने के अवशिष्ट पदार्थों से लेकर तमाम तहत के कचरों से हमने नदियों का पेट भर दिया है. जाहिर है, नदियों की सतह उथली हो गयी है और पानी धारण करने की उसकी क्षमता कम हो गयी है.
ऊपर से नदियों के बहाव को भी हमने उसके रास्ते में नाना प्रकार के अवरोध खड़ा कर बाधित कर दिया है. नतीजा है बाढ़ और उससे उत्पन्न तबाही. यह तात्कालिक ही नहीं, दीर्घकालिक और बहुत मायने में स्थायी समस्याएं भी पैदा करती है, जो सामाजिक-आर्थिक रूप से पूरे इलाके के जीवन को प्रभावित करती है. अत: जरूरी है कि हम नदियों के स्वाभाविक प्रवाह और स्वास्थ्य को बचाने का संकल्प लें.
निलेश मेहरा, गोड्डा
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




