डर लगता है

Updated at : 11 Jun 2018 6:58 AM (IST)
विज्ञापन
डर लगता है

अपनी जरूरतों को पूरा करने के दौरान कभी घर पहुंचने में रात हो जाती है, तो बस स्टैंड से अकेले घर आते समय हमेशा एक भय बना रहता है. न जाने कौन पीछे से आकर सामान छीन कर भाग जाये. विरोध करने पर मार-पीट करे. तब हम असहाय महसूस कर रहे होंगे. अगर आप लड़की […]

विज्ञापन

अपनी जरूरतों को पूरा करने के दौरान कभी घर पहुंचने में रात हो जाती है, तो बस स्टैंड से अकेले घर आते समय हमेशा एक भय बना रहता है. न जाने कौन पीछे से आकर सामान छीन कर भाग जाये. विरोध करने पर मार-पीट करे. तब हम असहाय महसूस कर रहे होंगे. अगर आप लड़की हैं, तो समझिए कि एक-एक कदम जान हथेली पर लेकर बढ़ा रही हैं.

आप पुलिस स्टेशन में शिकायत भी नहीं कर सकते, क्योंकि बहुत-से मौकों पर तो पुलिस सामने खड़ी होकर तमाशा देखती है और रात के वक्त मदद करने की उसकी सोच बहुत सीमित है. ऐसे में हमारे हिस्से सिवाय डर के कुछ भी नहीं होता. काश, इस डर को खत्म करने वाली व्यवस्था कोई दे पाता.

उत्सव रंजन, नीमा, हजारीबाग

विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola