जीवन में गर्मी का योगदान

Updated at : 04 Jun 2018 6:57 AM (IST)
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जीवन में गर्मी का योगदान

आलोक पुराणिक वरिष्ठ व्यंग्यकार puranika@gmail.com गर्मी विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है:- गर्मी का हमारे जीवन में घणा महत्व है. इस वक्त चुनाव हों, तो हर नेता हर घर के सामने समंदर लाने का वादा कर सकता है, यह अलग बात है कि वह बिजली भी हर घर […]

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आलोक पुराणिक

वरिष्ठ व्यंग्यकार

puranika@gmail.com

गर्मी विषय पर आयोजित निबंध प्रतियोगिता में प्रथम पुरस्कार विजेता निबंध इस प्रकार है:-

गर्मी का हमारे जीवन में घणा महत्व है. इस वक्त चुनाव हों, तो हर नेता हर घर के सामने समंदर लाने का वादा कर सकता है, यह अलग बात है कि वह बिजली भी हर घर में न ला पाता है. एक नेता कहता है कि बिजली गांव में आ गयी है.

वह यह न बताता है कि शहर से गायब होकर बिजली गांव पहुंची है. शहर वाला समझता है कि गांव में पहुंच गयी बिजली और गांव वाला सोचता है कि शहर से ही न चली बिजली. इस तरह से गर्मी में हमें नये झूठ देखने को मिल जाते हैं.

बिजली प्राचीन फिल्मों में ऐसी ग्रामीण नायिका का नाम होता था, जो नाच बहुत अच्छा करती थी. बिजली एक साथ फिल्मों, गांवों और शहरों से गायब मिलती है गर्मी में.

गर्मियों में कई ऐसी महत्वपूर्ण खबरें आती हैं, जिनसे कई परिवारों में गरम माहौल शांत हो जाता है. जैसे गर्मियों में खबरें आ रही हैं कि शिमला में पानी गायब हो लिया है. पानी का संकट है. कई घरों की शांति पर संकट गर्मियों में आ जाता है, जब घरवाले जिद मचाते हैं कि शिमला जाना है. शिमला में पानी संकट जैसी खबरों से कई गृहपतियों को राहत मिलती है.

हजारों की रकम बच जाती है सिर्फ यह बताना पड़ता है कि पानी संकट, बिजली संकट के लिए शिमला में क्यों जाना. ये सारे संकट बहुत ही सस्ते, कास्ट इफेक्टिव तरीके से अपने ही शहर में देखे जा सकते हैं. कई पतियों की कलेजे को गहरी ठंडक तब पड़ेगी, जब हर हिल स्टेशन से गर्मी में इस तरह की खबरें आने लगें कि पानी का संकट हो लिया, बिजली का संकट हो लिया.

गर्मियों में अलग तरह की खबरों से पाठकों का टेस्ट बदलता है. सर्दियों में खबरें आती हैं कि गरीबों के लिए कंबल परियोजना में घोटाला हुआ. गर्मियों में जल टैंकर घोटाला होने लगता है. बारिश में भरी नालियों और टूटी सड़कों की पोल खुलने लगती है. इस तरह हम देखते हैं कि मौसम बदलते रहते हैं, पर ना बदलनेवाला एक ही आइटम है- वह है घोटाला.

गर्मियों का सामाजिक महत्व भी है. एयरकंडीशन घरों में हर कमरे को बंद रखना पड़ता है. बंदा कमरे से बाहर तक न झांकता. पर जब कई दिनों तक बिजली गायब रहे, इनवर्टर, जेनेरेटर सब टें बोल जाएं, तो फिर घनघोर एयरकंडीशंडी को भी खुले में आना पड़ता है.

तब एयरकंडीशंडी को पता चलता है कि बगल के घर में जो रहते हैं, उनसे गुड माॅर्निंग हुए कई साल बीत गये और हजारों किलोमीटर दूर बसे व्हाॅट्सअपबाजी वाले समूह में रोज गुड माॅर्निंग, गुड नून, गुड इवनिंग और गुड नाइट हो रही है. उपस्थित गर्मी और गायब बिजली की कृपा से यह एहसास होता है कि अगर हम मर गये, तो हमें निबटाने में पड़ोसियों का ही योगदान रहेगा, उन दूर बैठे व्हाॅट्सअप वालों का कतई नहीं.इस तरह से हम कह सकते हैं कि गर्मी का हमारे सामाजिक जीवन में घणा योगदान है.

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