वातावरण की कीमत पर विकास

प्रकृति से ही हमारी जरूरत के सामान उपलब्ध होते हैं. जीवन के लिए जो भी आवश्यक वस्तु है, वह प्रकृति से ही मिलती है. जैसे हवा, पानी, अनाज, फल-फूल आदि. इनमें से किसी एक भी तत्व के बिना पृथ्वी पर जीवन असंभव है. प्रकृति द्वारा प्रदान की गयी इस अमूल्य सौगात का मनुष्य अपने स्वार्थ […]
प्रकृति से ही हमारी जरूरत के सामान उपलब्ध होते हैं. जीवन के लिए जो भी आवश्यक वस्तु है, वह प्रकृति से ही मिलती है. जैसे हवा, पानी, अनाज, फल-फूल आदि. इनमें से किसी एक भी तत्व के बिना पृथ्वी पर जीवन असंभव है.
प्रकृति द्वारा प्रदान की गयी इस अमूल्य सौगात का मनुष्य अपने स्वार्थ में अंधाधुंध दोहन कर रहा है. इसे दूषित भी कर रहा है. इन सबके कारण धीरे-धीरे धरती पर पर्यावरण का संतुलन बिगड़ रहा है और कई नयी बीमारियों एवं आपदाओं का जन्म हो रहा है.
ऐसा ही होता रहा, तो एक दिन पृथ्वी पर से जीवन खत्म हो जायेगा. इसलिए समय रहते सभी राज्य सरकारों व केंद्र सरकार को इस पर गंभीरता से विचार करना होगा. ऐसा विकास किस काम का जब जीवन ही संभव न हो. अगली पीढ़ी के लिए हम सभी को इस पर गंभीरता से सोचना ही पड़ेगा.
गौरव कुमार, इमेल से
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