हाय-तौबा किसलिए

Updated at : 31 May 2018 6:39 AM (IST)
विज्ञापन
हाय-तौबा किसलिए

देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, जो एक निष्ठावान कांग्रेसी रहे हैं, के द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए सहमति देने की खबर से कांग्रेस के अंदरखाने हलचल मची हुई है. कइयों ने उन्हें इसमें शामिल होने से बचने की सलाह दी है. आश्चर्य की […]

विज्ञापन
देश के पूर्व राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी, जो एक निष्ठावान कांग्रेसी रहे हैं, के द्वारा राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के एक कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि शामिल होने के लिए सहमति देने की खबर से कांग्रेस के अंदरखाने हलचल मची हुई है.
कइयों ने उन्हें इसमें शामिल होने से बचने की सलाह दी है. आश्चर्य की बात है! आरएसएस एक राष्ट्रवादी सामाजिक-सांस्कृतिक संगठन है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में सदैव मातृभूमि की नि:स्वार्थ सेवा की है.
चाहे बाढ़, भूकंप या सुनामी जैसी आपदा हो या दुश्मन देश की फौज से होने वाला आमने-सामने का युद्ध, हर कठिन वक्त में इसके स्वयंसेवकों ने आगे बढ़कर देश के लिए अपनी सेवाएं अर्पित की है, अपना खून दिया है. गौरतलब है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से सरदार पटेल और नेहरू जी भी प्रभावित थे.
यही कारण है कि 1963 के गणतंत्र दिवस के परेड में संघ के स्वयंसेवकों को आमंत्रित किया गया था. शास्त्री जी ने भी 1965 में भारत पाकिस्तान युद्ध के समय तत्कालीन सरसंघचालक गोलवलकर को राष्ट्रीय एकता परिषद की बैठक में बुलाया था. यही तो लोकतंत्र की खूबसूरती है कि इसमें विरोधी विचारधाराओं के बीच भी सार्थक संवाद की गुंजाइश सदैव बनी रहती है. फिर इस तरह की हाय-तौबा किसलिए?
चंदन कुमार, देवघर.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola