चुनौतीपूर्ण है पांचवां साल

Updated at : 30 May 2018 5:50 AM (IST)
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चुनौतीपूर्ण है पांचवां साल

तीन दशक से आ रहे खंडित जनादेश के बाद मई 2014 में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था.जनता के इस समर्थन और विश्वास को सलाम करते हुए जब नरेंद्र मोदी ने संसद की चौखट पर अपना माथा रखा था, तभी एक नये युग की शुरुआत का एहसास हुआ था. पिछले चार साल में उन्होंने […]

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तीन दशक से आ रहे खंडित जनादेश के बाद मई 2014 में किसी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिला था.जनता के इस समर्थन और विश्वास को सलाम करते हुए जब नरेंद्र मोदी ने संसद की चौखट पर अपना माथा रखा था, तभी एक नये युग की शुरुआत का एहसास हुआ था. पिछले चार साल में उन्होंने योजनाओं के जरिये इस विश्वास को और मजबूत कर दिया. मोदी पर यह भरोसा बढ़ता गया और भाजपा की झोली भरती गयी.
हां, इस बीच बिहार व दिल्ली जैसे चुनावों में झटका भी लगा और उसके साथ ही यह एहसास भी कराया गया कि विकास की लहर के बावजूद जातिगत राजनीति का अंत अभी नहीं हुआ है और न ही गठबंधन का. ऐसे में जब मोदी सरकार पांचवें साल में प्रवेश कर चुकी है, तो उसे कदम बहुत संभल कर रखने होंगे.
डाॅ हेमंत कुमार, गोराडीह, भागलपुर.
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