बच्चों की आभासी दुनिया
Updated at : 08 May 2018 4:59 AM (IST)
विज्ञापन

वर्तमान में इंटरनेट युवाओं और बच्चों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा हैं. बड़े-बुजुर्गों की बाहों से लिपट कर कहानियां सुनने वाला बचपन अब कंप्यूटर, टीवी, इंटरनेट और वीडियो गेम्स में व्यतीत हो रहा हैं. बच्चों का बचपन परंपरागत मनोरंजन की दुनिया से हटकर संचार माध्यमों की दुनिया की ओर आकर्षित हो रहा […]
विज्ञापन
वर्तमान में इंटरनेट युवाओं और बच्चों को तेजी से अपनी गिरफ्त में ले रहा हैं. बड़े-बुजुर्गों की बाहों से लिपट कर कहानियां सुनने वाला बचपन अब कंप्यूटर, टीवी, इंटरनेट और वीडियो गेम्स में व्यतीत हो रहा हैं. बच्चों का बचपन परंपरागत मनोरंजन की दुनिया से हटकर संचार माध्यमों की दुनिया की ओर आकर्षित हो रहा है.
ज्ञानाश्रित सूचना क्रांति के तकनीकी संवाद ने परिवार और उसकी सामूहिकता को विखंडित किया हैं, जिसका सर्वाधिक प्रभाव बच्चों पर हुआ हैं. बच्चों के जीवन में सांस्कृतिक मूल्यों को सीख देने वाले परिवार और स्कूल भी धीरे-धीरे दूर हो रहे हैं.
बच्चे हमारे समाज व राष्ट्र का भविष्य हैं. अतः उनके वात्सल्य भाव को संरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी बनती हैं. जरूरत है कि आभासी दुनिया से पहले सामाजिक संबंधों की प्रत्यक्ष दुनिया से परिचित करवाया जाये, तभी बचपन का सही निवेश सार्थक हो पायेगा.
मुकेश कुमावत, इ-मेल से.
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
विज्ञापन
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए
विज्ञापन




