रेप के कारणों पर शोध हो

देश में बलात्कार के वारदात थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. आखिर क्या कारण है कि वासना के घोड़े पर सवार व्यक्ति के मन से कानून का खौफ निकल जाता है? सेक्स हमारी एक मौलिक जरूरत है, परंतु अनेक कारणों से यह इच्छा कभी-कभी मर्ज बनकर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देता है. यह […]
देश में बलात्कार के वारदात थमने का नाम नहीं ले रहे हैं. आखिर क्या कारण है कि वासना के घोड़े पर सवार व्यक्ति के मन से कानून का खौफ निकल जाता है? सेक्स हमारी एक मौलिक जरूरत है, परंतु अनेक कारणों से यह इच्छा कभी-कभी मर्ज बनकर सामाजिक ताने-बाने को छिन्न-भिन्न कर देता है.
यह एक जैविक समस्या भी हो सकती है. यह इच्छा व्यक्तिनिष्ठ है जिसके एक छोर पर डॉ एपीजे अब्दुल कलाम और मदर टेरेसा जैसे लोग हैं. बीच में आम लोग तथा दूसरे छोर पर तेरह से तिरासी उम्र व तनी से झुकी कमर तक के वे लोग हैं, जो नन्हीं सी नारी देह को भी फाड़कर अपनी हवस पूरी करने में भय नहीं खाते हैं.
जिस तरह पसीना, सुगर, थायरॉक्सिन आदि की मात्रा को दवाओं से संतुलित किया जाता है, वैसा इस इच्छा के साथ भी हो सकता है क्या? दवाओं द्वारा भी अनियंत्रित सेक्स की रोकथाम की संभावनाओं पर शोध किया जाना चाहिए.
उषा किरण, रांची
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