यह क्या हो रहा है!

संतोष उत्सुक टिप्पणीकार किसी जमाने में बुद्धूबक्से यानी टेलीविजन के कार्यक्रमों में एक कलाकार, ‘यह क्या हो रहा है’ खास शैली में बोलकर हंसाया करते थे. आज यह वाक्य वातावरण में निरंतर कौंध रहा है. खुलकर बोलना असुरक्षित है, कोई बोले कैसे! लेकिन, दुखी मन चीखता है- ‘यार यह क्या हो रहा है’. बड़ी मुश्किल […]
संतोष उत्सुक
टिप्पणीकार
किसी जमाने में बुद्धूबक्से यानी टेलीविजन के कार्यक्रमों में एक कलाकार, ‘यह क्या हो रहा है’ खास शैली में बोलकर हंसाया करते थे. आज यह वाक्य वातावरण में निरंतर कौंध रहा है. खुलकर बोलना असुरक्षित है, कोई बोले कैसे! लेकिन, दुखी मन चीखता है- ‘यार यह क्या हो रहा है’.
बड़ी मुश्किल से बैंक घोटाले करके देश छोड़नेवालों की तरफ से ध्यान हटाया था कि विश्वास की उपजाऊ जमीन पर नये घोटाले, बदमाशियां, खुराफातें उगती ही जा रही हैं. अब सीबीएसई के पेपर लीक हो गये हैं, जो आम लोगों के लिए फेसबुक डाटा चुराने से भी ज्यादा खतरनाक हैं.
गुनहगारों को बख्शा तो नहीं जायेगा, लेकिन बच्चों को बख्शा जाना जरूरी है. पता नहीं क्या-क्या हो रहा है.
कुछ दिन पहले विश्व बैंक वाले रिपोर्ट उछाल रहे थे कि हमारे देश का जीएसटी सिस्टम दुनिया में सबसे जटिल, सबसे उच्च दरों वाला है और इसमें सबसे ज्यादा सीढ़ियां हैं. इंडिया अपडेट की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग विश्व ताकत बन चुके न्यू इंडिया के साथ उसके जानी दोस्त व घाना को रखा जा सकता है. यह क्या किया जा रहा है. जरूर इसमें विदेशी हाथ है.
वर्ल्ड बैंक वालों को समझना चाहिए कि बदले हुए परिवेश में हमें किस रंग और स्वाद की मनपसंद रिपोर्ट चाहिए. इतने विज्ञापन, सेमिनार, भाषण और राष्ट्रीय मेहनत करने के बाद गलत सलाह क्यों स्वीकार करें कि टैक्स रेट कम कर दो. हमारी देश प्रेमी समझदार जनता राष्ट्रहित में सब सह रही है और कुछ न कह रही है टैक्स भी दे रही है, तो दुनिया वालों को क्या परेशानी है. इतिहास जानता है कि हमारी हर सरकार पारदर्शी तरीके से राजकाज करने में सिद्धहस्त है. सतर्कता, कुशलता, सहजता बरत रहे नतीजे कहते हैं जरूरी मामलों में तप्तीश जारी है. हे भगवान यह क्या हो रहा है.
नोबेल पुरस्कार विजेताओं को कौन प्रेरित कर रहा है. गलत बोल रहे हैं कि भारत की कहानी बेरोजगारी के साथ खत्म हो सकती है. उन्हें याद दिलाना पड़ेगा- कुछ बात है हमारी बनावट में कि मिटती नहीं हस्ती हमारी.
फेसबुक इतने काम की वस्तु साबित हो रही है और कह रहे हैं कि दुनिया के अंत के कारणों में से फेसबुक हो सकती है. यह क्या हो रहा है. उधर यूनेस्को परेशान हो गया है, उनको हमारी शानदार राष्ट्रीय योजनाओं का पता नहीं है. कह रहा है आनेवाले बीस बरसों में इस देश पर भारी जल संकट आनेवाला है.
इतिहास गवाह है कि बड़े-बड़े संकट से बखूबी सफल हो निकलकर हमारा लोकतंत्र मजबूत ही हुआ है और होता रहेगा. हैरानी की बात तो यह है कि विदेशियों के साथ देसी भी कम नहीं हैं. किसानों को अब भी बीमा राशि के तीन चार पांच रुपये के चेक दिये जा रहे हैं.
शर्म की बात है डिजिटल इंडिया में चेक दे रहे हैं. यार पता तो कर लो कि एक चेक कितने का पड़ता है. चौबीसों घंटे मनोरंजन खा रहे हैं, फिर भी करोड़ों का पेट नहीं भरता. यह क्या हो रहा है!
प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी
लेखक के बारे में
By Prabhat Khabar Digital Desk
यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।
Prabhat Khabar App :
देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए




