घरों में समाते पहाड़ !

Updated at : 22 Dec 2017 5:59 AM (IST)
विज्ञापन
घरों में समाते पहाड़ !

जंगल, पहाड़ और पर्यावरण को लेकर सवाल हम खूब उठाते हैं, मगर इसका जवाब कौन देगा? सालों से उठते ये सवाल वहीं-के-वहीं हैं, जबकि गांव से महानगर तक कंक्रीटों के महल जंगल की तरह पसर गये हैं. इसके लिए खुद हम जिम्मेदार हैं. सच तो यह है कि विकास की दौड़ में हम एक ओर […]

विज्ञापन
जंगल, पहाड़ और पर्यावरण को लेकर सवाल हम खूब उठाते हैं, मगर इसका जवाब कौन देगा? सालों से उठते ये सवाल वहीं-के-वहीं हैं, जबकि गांव से महानगर तक कंक्रीटों के महल जंगल की तरह पसर गये हैं. इसके लिए खुद हम जिम्मेदार हैं. सच तो यह है कि विकास की दौड़ में हम एक ओर सवाल उठाते और दूसरी ओर उन सवालों की वजह भी बनते हैं.
हम पेड़ लगा सकते हैं, लेकिन हम ऐसा कर नहीं पा रहे. पहाड़ तो हम उगा भी नहीं सकते, मगर उसे नष्ट करने में अंतिम दम तक लगे हुए हैं. ऐसे में पहाड़ो की घटती ऊंचाई को रोक पाना तो नामुमकिन है ही, पहाड़ाें के वजूद को बचाना भी मुश्किल हो गया है. हालात यही रहे, तो हमारी आने वाली पीढ़ी कागज पर बने पहाड़ों में ही उनकी ऊंचाई तलाशती रह जायेगी.
एमके मिश्रा,रातू.
विज्ञापन
Prabhat Khabar Digital Desk

लेखक के बारे में

By Prabhat Khabar Digital Desk

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Prabhat Khabar App :

देश, एजुकेशन, मनोरंजन, बिजनेस अपडेट, धर्म, क्रिकेट, राशिफल की ताजा खबरें पढ़ें यहां. रोजाना की ब्रेकिंग हिंदी न्यूज और लाइव न्यूज कवरेज के लिए डाउनलोड करिए

Download from Google PlayDownload from App Store
विज्ञापन
Sponsored Linksby Taboola