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ओडिशा में सिंचाई के लिए जल कर चुकाने के बाद भी पानी नहीं मिलने से किसान निराश

Updated at : 27 May 2023 2:13 PM (IST)
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ओडिशा में सिंचाई के लिए जल कर चुकाने के बाद भी पानी नहीं मिलने से किसान निराश

केनाल के निर्माण, मरम्मत व विकास पर पिछले पांच साल में चार करोड़ रुपये खर्च हो गये, लेकिन ओडिशा के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल रहा है. हालांकि, सिंचाई के लिए उन्हें जल कर का भुगतान करना पड़ता है.

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ओडिशा के झारसुगुड़ा जिले के लैयकरा ब्लॉक में केनाल निर्माण में भ्रष्टाचार के कारण जल कर देने के बाद भी किसानों को इसका लाभ नहीं मिल रहा है. इस संबंध में मीडिया में रिपोर्ट आने के बाद विभागीय अधिकारियों की नींद खुली है. अब इस मामले की जांच की जा रही है, जिससे किसानों के खेत तक पानी पहुंचाने की व्यवस्था हो सके.

5 साल में केनाल निर्माण व मरम्मत पर 4 करोड़ हो गये खर्च

जानकारी के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में विभाग की ओर से केनाल निर्माण व मरम्मत तथा इसके विकास पर चार करोड़ रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं. लेकिन आज तक केनाल का पानी निचले इलाकों तक नहीं पहुंच पाया है. जबकि किसान जल कर दे रहे हैं. इस विभागीय लापरवाही से किसानों में निराशा है. उन्हें कृषि कार्य शुरू करने के लिए बरसात का इंतजार करना पड़ रहा है. ठेकेदार करोड़ों रुपये का काम लेकर माला-माल हो रहे हैं.

विजिलेंस से करायी जाये जांच

किसानों का कहना है कि ऐसे केनाल निर्माण का क्या फायदा, जिससे हमारे खेतों में पानी नहीं पहुंचे. उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि ठेकेदार व विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत से ही भ्रष्टाचार खुलेआम हो रहा है. इसकी जांच विजिलेंस से करायी जाये, तो भ्रष्टाचार का खुलासा हो सकेगा.

केनाल को डिस्मेंटल कर फिर से करा रहे हैं काम

इधर, इस संबंध में विभागीय एसडीओ अजीत मांझी से पूछने पर उन्होंने कहा कि घटिया स्तर का काम होने के कारण हम इस केनाल को डिस्मेंटल कर फिर से काम करा रहे हैं. इस निर्माण कार्य में मैट्रिक पास कम आयु के किशोर-किशोरियों से काम कराये जाने संबंधी एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि की अगर ऐसा है, तो यह पूरी तरह से गलत है. वे खुद इसकी जांच करेंगे.

घटिया काम की शिकायत जायज : एसडीओ

एसडीओ अजीत मांझी ने बताया कि यहां पर घटिया काम होने की शिकायत जायज है. किये गये काम की गुणवत्ता खराब थी. जिस कारण हम इसे डिस्मेंटल कर दोबारा निर्माण करा रहे हैं, ताकि किसानों को इसका लाभ मिल सके.

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