सेटेलाइट से ग्लोबल वार्मिंग की निगरानी

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सेटेलाइट से ग्लोबल वार्मिंग की निगरानी

अरबों यूरो वाले कॉपरनिकस प्रोजेक्ट के तहत एक और नया उपग्रह सेंटिनेल-3ए अंतरिक्ष में छोड़ा गया है, जो जलवायु परिवर्तन पर नजर रखेगा. इसकी बड़ी खासियत है कि यह महज दो दिनों में पूरी पृथ्वी की तसवीर भेज सकता है़ यह उपग्रह अल नीनो जैसी मौसम से जुड़ी घटनाओं का अनुमान लगाने और बढ़ते जलवायु […]

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अरबों यूरो वाले कॉपरनिकस प्रोजेक्ट के तहत एक और नया उपग्रह सेंटिनेल-3ए अंतरिक्ष में छोड़ा गया है, जो जलवायु परिवर्तन पर नजर रखेगा. इसकी बड़ी खासियत है कि यह महज दो दिनों में पूरी पृथ्वी की तसवीर भेज सकता है़ यह उपग्रह अल नीनो जैसी मौसम से जुड़ी घटनाओं का अनुमान लगाने और बढ़ते जलवायु परिवर्तन पर नजर रखने में मदद करेगा. यह उपग्रहों के उस तंत्र का ही एक हिस्सा है, जो पृथ्वी की निगरानी कर रहे हैं.

सेंटिनेल-3ए को रूस के उत्तर-पश्चिमी आर्कान्जेस्क इलाके के प्लेस्टेस्क कॉस्मोड्रोम से हाल ही में रॉकेट लॉन्चर की मदद से छोड़ा गया. इस उपग्रह की कक्षा पृथ्वी से 815 किमी ऊंचाई पर निर्धारित की गयी है, जहां से यह समुद्र की सतह के तापमान और ऊंचाई के आंकड़े दर्ज करेगा. ये आंकड़े मौसम और बढ़ते तापमान की भविष्यवाणियों को और अधिक सटीक बता पाने में मदद करेंगे. 2017 के मध्य में एक और उपग्रह भेजा जाना है. उस उपग्रह के साथ मिल कर सेंटिनेल-3ए से मिलने वाले आंकड़े शिपिंग कंपनियों के लिए सटीक रूट चार्ट भी बना पायेंगे.

ये आंकड़े जंगलों में लगने वाली आग, तेल के रिसाव और फसलों के पूर्वानुमान का भी पर्यवेक्षण कर पायेंगे. यूरोपीय संघ और यूरोपीय स्पेस एजेंसी वर्ष 2020 तक इस प्रोजेक्ट के लिए आठ अरब यूरो से ज्यादा रकम मुहैया कराने पर सहमत हुए हैं.

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