भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन विधेयक खतरनाक : हेमंत सोरेन
Author Prabhat khabar digital desk
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दुमका: झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में संशोधन का विधेयक एसपीटी-सीएनटी एक्ट में संशोधन से भी गंभीर विषय है. यह रघुवर सरकार का खतरनाक एजेंडा है. भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 में बना कानून पर्याप्त है, लेकिन सरकार साजिश के तहत कॉरपोरेट के लिए इस कानून […]
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दुमका: झामुमो के कार्यकारी अध्यक्ष सह नेता प्रतिपक्ष हेमंत सोरेन ने कहा कि भूमि अधिग्रहण में संशोधन का विधेयक एसपीटी-सीएनटी एक्ट में संशोधन से भी गंभीर विषय है. यह रघुवर सरकार का खतरनाक एजेंडा है. भूमि अधिग्रहण के लिए 2013 में बना कानून पर्याप्त है, लेकिन सरकार साजिश के तहत कॉरपोरेट के लिए इस कानून में भी संशोधन करने पर आमदा है.
उन्होंने दुमका स्थित आवास पर पत्रकारों से कहा कि सरकार को अपनी गलत नीतियों व गलत सोच के कारण सीएनपीटी व एसपीटी एक्ट में संशोधन का विधेयक वापस लेना पड़ा था. एसपीटी-सीएनटी को लेकर सरकार की चतुर मंशा रही है. वह पहले इस संशोधन विधेयक के रूप में पानी में पत्थर फेंकने का काम रही थी. उसके परिणाम को वह जानना चाहती थी. जब उसमें सफलता नहीं मिली, तब सरकार ने यह नया एजेंडा भूमि अधिग्रहण कानून में संशोधन विधेयक के रूप में सामने लाया है.
हेमंत ने कहा कि उनकी पार्टी संवेदनशील मसलों पर सदन में सरकार के साथ है, लेकिन सरकार अनर्गल ही सदन को बाधित करने का आरोप झामुमो पर लगाती रही है. यदि सरकार समाज व जनता के भलाई के लिए सोचे व उन्हें विकास के पथ पर ले जाने का कार्य करे, तो विपक्ष उनके साथ होगा. हेमंत ने कहा कि माॅनसून सत्र में दोनों विधेयकों पर सरकार जल्दबाजी में थी.
इनको इतना भी धैर्य नहीं था कि ये दस दिन भी रुक पाते. हेमंत ने कहा कि भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक व धर्मांतरण विधेयक को लेकर उनकी पार्टी जनता की अदालत में जायेगी. जरूरत पड़ी, तो राज्यपाल और राष्ट्रपति के पास भी जायेगी. जिस प्रकार सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन के खिलाफ झामुमो ने लोगों को जोड़ा था. उसी प्रकार इस मामले को लेकर झामुमो जन-जन को जोड़ेगी, ताकि राज्य के अंदर सांप्रदायिक सदभावना बनी रहे.
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