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ranchi

  • Jan 17 2019 2:07AM
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झारखंड में छोटे व बड़े व्यापारियों के लिए सिक्के बने परेशानी का सबब, बैंक कहता है सिक्के कौन गिनेगा

झारखंड में छोटे व बड़े व्यापारियों के लिए सिक्के बने परेशानी का सबब, बैंक कहता है सिक्के कौन गिनेगा
रांची : झारखंड में छोटे व बड़े व्यापारियों के लिए सिक्के परेशानी का सबब बन गये हैं. उनके पास सिक्कों का अंबार लग गया है. इस मामले को लेकर जब भी आरबीआइ के पास शिकायत होती है, तो अधिकारी साफ कहते हैं कि बैंकों को सिक्के लेने के निर्देश दिये गये हैं, लेकिन बैंक नहीं सुन रहे हैं और निर्देश कागजों में सिमट कर रह गये हैं.  सिक्काें की समस्या दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है.

बैंक गिनाने लगते हैं परेशानी
सिक्के नहीं लेने के बैंककर्मी परेशानियां बताने लगते हैं. बैंक कभी कहता है कि स्टाफ की कमी है, सिक्के कौन गिनेगा. कभी कहता है कि सिक्के रखने के लिए जगह नहीं है. पहले से ही हमारे पास सिक्कों की भरमार है. नये करेंसी चेस्ट खोलने की इजाजत मांगी : बैंक  कर्मियों का कहना है कि सारे करेंसी चेस्ट फुल हो गये हैं. आरबीआइ जब तक  सिक्कों को वापस नहीं लेगा, कोई समाधान नहीं है. जल्द-से-जल्द नये करेंसी  चेस्ट खोलने की इजाजत दी जाये. इसके लिए बैंकों ने आवेदन भी दे रखा है.  आरबीआइ भी बैंकों को नये सिक्के नहीं दे. 
 
कई बार पत्र लिखा गया, कोई कार्रवाई नहीं 
बैंकों द्वारा सिक्के जमा नहीं लिये जाने के मामले में झारखंड चेंबर सहित विभिन्न संगठनों ने आरबीआइ को  कई बार पत्र भी लिखा है. बैंकों में ग्राहकों से हर दिन केवल 1,000 रुपये तक के सिक्के ही लिये जा रहे है, जबकि  बैंक शाखाएं सिक्के लेने से सीधे इनकार कर रही हैं. 
 
यह हैं हालात 
एफएमसीजी के व्यवसाय में जुड़े डिस्ट्रीब्यूटर बताते हैं कि दुकानों में सिक्के अधिक आते हैं, लेकिन बैंक जरूरत के अनुसार इन्हें जमा नहीं लेता है. झारखंड चेंबर के एफएमसीजी उप समिति के चेयरमैन व डिस्ट्रीब्यूटर संजय अखौरी कहते हैं कि रांची में ही विभिन्न डिस्ट्रीब्यूटरों के पास एक करोड़ रुपये से अधिक के सिक्के फंसे हुए हैं. 
उनके पास हर दिन कलेक्शन में लगभग 25,000 रुपये के सिक्के आते हैं, जबकि बैंक 100 पीस ही सिक्का लेता है. 10-12 लाख रुपये के सिक्के उनके पास जमा हैं. 

पेट्रोल पंपों में पांच करोड़ रुपये से अधिक के सिक्के फंसे 
कमोवेश यही हाल पेट्रोल पंपों का भी है. रांची समेत पूरे झारखंड के पेट्रोल पंपों में पांच करोड़ से अधिक के सिक्के जमा हो गये हैं. झारखंड में लगभग 1,100 पंप हैं. 50,000 रुपये औसत के हिसाब से यह पांच करोड़ 50 लाख रुपये होता है. हालत यह है कि खूंटी रोड स्थित विमला फ्यूल्स में लगभग नौ लाख रुपये के सिक्के पड़े हैं.
 
 दुलारी संस फ्यूल्स में लगभग तीन लाख रुपये के सिक्के, शांभवी में लगभग 2.5 लाख रुपये और नंदी फ्यूल्स में लगभग 1.5 लाख रुपये के सिक्के फंसे हुए हैं. बैंक हर दिन 1,000 रुपये के सिक्के लेता है.  
 
मीडिया घराने भी हैं परेशान 
झारखंड और बिहार के मीडिया घराने भी सिक्कों को लेकर परेशान हैं. दोनों राज्यों में हर माह लगभग सात से आठ करोड़ रुपये के अखबारों की बिक्री होती है. इसमें लगभग 20 प्रतिशत सिक्के लोग हॉकरों को देते हैं. इस हिसाब से लगभग एक करोड़ 60 लाख रुपये के सिक्के हर माह मीडिया घराने के पास आ रहे हैं. जो डंप हो रहे हैं. 
 
कई बार एडवाइजरी जारी कर चुका है आरबीआइ 
सिक्के  जमा करने को लेकर आरबीआइ ने कई बार एडवाइजरी जारी की. एक एडवाइजरी में  आरबीआइ ने सभी बैंक के नोटिस बोर्ड 'यहां सिक्के जमा होते हैं' की सूचना  लगाने काे कहा था. दूसरी एडवाइजरी में सभी बैंकों को सिक्का मेला लगाने का  निर्देश दिया था. इससे पहले फरवरी, 2018 में भी कहा था कि बैंक सिक्के जमा  लें. इसके लिए कोई दलील नहीं चलेगी. इस समय भी आरबीआइ ने बैंकों को चेताया  था. 

सिक्के लेने से बैंक नहीं कर सकते इनकार
आरबीआइ के सर्कुलर में स्पष्ट कहा गया है कि कोई भी बैंक सिक्के लेने से इनकार नहीं कर सकता है. साथ ही बैंकों के क्षेत्रीय प्रबंधक शाखाओं में जाकर इस बात का औचक  निरीक्षण करेंगे कि सिक्कों की स्वीकृति के संबंध में आरबीआइ के दिशा-निर्देशों का पालन किया जा रहा है या नहीं. इधर, आरबीआइ ने झारखंड के सभी बैंकों को सभी प्रकार के सिक्कों की स्वीकृति के दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है.
 
बैंकों को सिक्के लेने के दिये गये हैं निर्देश
इस बीच भारतीय रिज़र्व बैंक ने झारखंड के सभी बैंकों को सभी प्रकार के सिक्के लेने के निर्देशों का कड़ाई से पालन करने काे कहा है. पूर्व सांसद अजय मारू द्वारा आरबीआइ के गवर्नर को पत्र लिखने के आलोक में बैंक के सहायक महाप्रबंधक एम राजकुमार ने यह निर्देश दिया है.  
 
पत्र में कहा गया है... आरबीआइ के पटना क्षेत्रीय कार्यालय ने झारखंड के तमाम  बैंकों के नियंत्रकों को परिपत्र में निहित सिक्कों की स्वीकृति के दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया है. आरबीआइ के परिपत्र में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि कोई भी बैंक सिक्का लेने से इनकार नहीं कर सकता.   
 
इससे पहले झारखंड के योजना सह वित्त विभाग के अवर सचिव राहुल कुमार ने भी 24 दिसंबर, 2018 को आरबीआइ को पत्र लिख कर 15 दिनों के अंदर सिक्कों की समस्या का समाधान करके अवगत कराने को कहा था.
 
हर जगह की शिकायत, कोई समाधान नहीं
प्रभात खबर के मुख्य वित्त पदाधिकारी आलोक पोद्दार ने आरबीआइ, पीएमओ को भी शिकायत की है, लेकिन इसका कोई समाधान नहीं निकला. हर जगह यही जवाब मिला कि बैंकों को सिक्के लेने हैं. नियम यह है कि बैंक शाखा में ग्राहक अपने खाता में जितने रुपये के सिक्के चाहें, जमा कर सकते हैं. श्री पोद्दार ने मुख्यमंत्री सचिवालय, झारखंड में भी शिकायत की है. इससे पूर्व बैंकिंग लोकपाल को भी समय-समय पर मामले से अवगत कराया गया था.
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